298 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
विनियम बनाने की जनजातियों को वही शक्ति देते हैं जो हमारी अनुसूची के द्वारा दी गई हैं। इसलिए अनुसूची कोई नई चीज नहीं है। यह मौजूदा स्थिति को जारी किए हुए है जैसे कि जनजातियाँ कुछ मामलों में नियम बनाने की शक्तियां रखते हैं। इसलिए कारण जो मैंने समझाये हैं उनका संशोधन बिल्कुल अनावश्यक है। इसलिए मैं इसका विरोध करता हूँ।
माननीय सभापति : मैं सुझाव दे रहा था कि वास्तव में यहाँ विचारधाराओं में जो
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यहाँ प्रकट की गई हैं इतना अन्तर है जो हमारे उस वाद-विवाद से प्रकट होगा जो हम कर चुके हैं। मैंने डॉ. अम्बेडकर के बयान को जैसा समझा है मैं विश्वास करता हूँ कि यदि दो सुझाव स्वीकार कर लिए जाएँ तो कदाचित बहुत से अन्तर दूर हो जायेंगे। इसलिए मैं यह सुझाव दे रहा था। कि विनियम में पैरा 10 के उपपैरा (2) के खण्ड (घ) सम्मिलित किए जाएँ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि हम इसे प्रारूपण समिति पर छोड़ दें
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तो यह उसे करेगी।
माननीय सभापति : मैं सुझाव दे रहा था कि “स्वशासी जिला क्षेत्र को घटाने“ के
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पश्चात् संशोधन संख्या 99 में उपपैरा (3) के खण्ड (घ) जोड़ते हैं कि शब्द अथवा ’एक स्वशासी जिले में से कोई क्षेत्र अलग करते हैं।’ इसमें सभी बिन्दु आ जायेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कि हम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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माननीय सभापति : मैं यह कठिनाई महसूस करता हूँ। मुझ सहित सदन के
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अधिकांश सदस्य स्थानीय समिति से परिचित नहीं हैं और इसलिए असम के बारे में अपने प्रकार से निश्चित तरीका अपनाने की स्थिति में नहीं हैं। वहाँ से अपने मित्रों द्वारा मार्गदर्शित होते हैं। उनके बीच मैं कुछ के बारे में अन्तर है। हमारी स्थिति बहुत कठिन हो जाती है। इसलिए मैं सुझाव दूंगा कि यह सबसे अच्छा होगा कि मामले को स्थानीय सरकार के लिए छोड़ दिया जाए। जो सुझाव मैंने दिये हैं स्थानीय सरकार को मामले से निपटने के योग्य बनाएंगे। मैं समझता हूँ कि मैंने जो दो सुझाव दिए हैं डॉ. अम्बेडकर को कोई आपत्ति नहीं होगी।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, श्रीमान मैं विनियम में 10(2)(घ) जोड़ने
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के लिए तैयार हूँ और दूसरे विषय में “अलग करने की शक्ति“ भी जोड़ता हूँ।
माननीय सभापति : मैं सोचता हूँ कि असम के दोस्तों को संतुष्ट करेगा।
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माननीय सभापति : पैरा 19 के अधीन प्रस्ताव भिन्न है।
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