299 माननीय श्री जे. जे. एम. निकोल्स रॉय : मैं ऐसा कोई कारण नहीं समझता
कि पैरा 19 के अधीन आप ऐसा विषय क्यों रखें जो पहले से ही पैरा 10 में आ गया है।
माननीय सभापति : पैरा 10 के उपपैरा (2) के उपखण्ड (घ) में रखने का विचार है, पैरा 10 पूरा रखने का नहीं।
माननीय श्री जे. जे. एम. निकोल्स रॉय : इस परन्तुक में रखने का क्या लाभ है? यह पैरा 10 पहले से ही है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : पैरा 10 के उपपैरा (2)का उपखण्ड केवल व्यापार को सम्मिलित करता है, धन उधार देना नहीं। यही सम्मिलित करना चाहते थे।
माननीय सभापति : अलग करने के प्रश्न के बारे में, यह मूल मसौदे में था।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्री निकोल्स रॉय, ठीक है मैं नहीं समझता कि आप कुछ खोते हैं।
माननीय श्री जे. जे. एम. निकोल्स रॉय : मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि क्या आप स्वायत्तशासी जिले से कोई क्षेत्र अलग करने की शक्तियों से संबंधित एक संशोधन वास्तविक शब्दों में रखने अथवा न रखने का विचार कर रहे हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : “अलग करना“ भी हम दे रहे हैं। “घटाना“ का अर्थ है“ अलग करना“।
माननीय सभापति : ‘‘घटाना’’ का अर्थ है ‘‘अलग करना।’’
(पैरा 19 यथा संशोधित और तालिका, भाग I और II छठी अनुसूची में जोड़े गये) माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि पैरा 19 के पश्चात् निम्नलिखित नया पैरा रखा जाए :
20-अनुसूची का संशोधन-(1) समय-समय पर विधि द्वारा परिवर्धन, परिवर्तन या निरसन द्वारा इस अनुसूची के किसी भी उपबंधों का संशोधन कर सकेगी और जब अनुसूची को इस प्रकार संशोधित हो जाए तो इस संविधान में इस अनुसूची का निर्देश इस प्रकार संशोधित अनुसूची का निर्देश समझा जाएगा।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 7 सितम्बर, 1949, पृ. 1075-1076
** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 7 सितम्बर, 1949, पृ. 1075-1079