अनुच्छेद 282 से 282 (ग) - Page 321

300 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(2) इस पैरा के उपपैरा में वर्णित ऐसी कोई विधि अनुच्छेद 304 के प्रयोजन के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी।

* * * * *

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं संशोधन को स्वीकार नहीं करता।

(शिब्बनलाल सक्सेना के पैरा 20 के )

(डॉ. भीमराव अम्बेडकर का संशोधन स्वीकार हुआ, पैरा 20 छठवी अनुसूची VI में संशोधित रूप में संविधान में जोड़ी गयी।)

अनुच्छेद 281

** माननीय सभापति : अब हम अनुच्छेद 281 पर आते हैं। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा प्रस्ताव है :

“कि अनुच्छेद 281 के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए :

’281- इस भाग में, जब तक कि अन्यथा अपेक्षित न हों, “राज्य“ शब्द से प्रथम अनुसूची के भाग I अथवा भाग III में तत्समय विनिर्दिष्ट राज्य अभिप्रेत है।“

(अनुच्छेद 281 संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 282 से 282 (ग)

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है कि :

“संशोधनों की सूची के संशोधन संख्या 3034 के संदर्भ में (पुस्तक II ) अनुच्छेद 282 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :

संघ अथवा राज्य में 282. इस संविधान के उपबंधों के अधीन रहते हुए, समुचित सेवारत व्यक्तियों की विधानमण्डल के अधिनियम संघ या किसी राज्य के कार्यों सेवारत व्यक्तियों की

नियुक्ति और सेवा की के सम्बन्ध में लोकसेवाओं और पदों के लिए भर्ती का, नियुक्ति और सेवा की

शर्तें तथा नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन शर्तें

कर सकेंगे :

परन्तु जब तक इस अनुच्छेद के अधीन समुचित विधानमण्डल के अधिनियम के द्वारा या अधीन इस निमित्त उपबंध नहीं बनाये जाते तब तक यथास्थिति संघ

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 7 सितम्बर, 1949, पृ. 1079

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 7 सितम्बर, 1949, पृ. 108-1082