अनुच्छेद 282 से 282 (ग) - Page 322

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के कार्यों के सम्बन्ध में सेवाओं और पदों के बारे में राष्ट्रपति तथा राज्यों के कार्यों के सम्बन्ध में सेवाओं और पदों के बारे में राज्य का राज्यपाल या किसी रियासत की कार्यां के संबंध में सेवाओं और पदों के बारे में उस रियासत का शासक ऐसी सेवाओं और पदों पर भर्ती तथा नियुक्त व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन करने वाले नियम बनाने के लिए सक्षम होगा। इस प्रकार निमित्त कोई नियम किसी ऐसे अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए प्रभावी होंगे।

संघ या राज्यों की सेवा 282क. (1) इस संविधान द्वारा अभिव्यक्त यथा उपबन्धित संघ या राज्यों की सेवा

करने वाले व्यक्तियों की के सिवाय प्रत्येक व्यक्ति, जो संघ की प्रतिरक्षा सेवा या करने वाले व्यक्तियों की

पदावधि असैनिक सेवा का या अखिल भारतीय सेवा का सदस्य है, पदावधि

अथवा संघ के अधीन प्रतिरक्षा से सम्बन्धित कोई पद अथवा

कोई असैनिक पद धारण करता है, राष्ट्रपति के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है, तथा प्रत्येक व्यक्ति जो राज्य की सैनिक सेवा का सदस्य है अथवा राज्य अधीन कोई पद धारण करता है यथास्थिति राज्य के राज्यपाल या राजप्रमुख के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है।

(2) इस बात के होते हुए भी, कि संघ या राज्य के अधीन असैनिक पद धारण करने वाला कोई व्यक्ति यथास्थिति राष्ट्रपति अथवा राज्य के राज्यपाल या राजप्रमुख के प्रसाद पर्यंत पद धारण करता है कोई संविदा, जिस के अधीन कोई व्यक्ति, जो प्रतिरक्षा सेवा या अखिल भारतीय सेवा अथवा संघ या राज्य की असैनिक सेवा का सदस्य नहीं है, ऐसे किसी पद को धारण करने के लिए इस संविधान के अधीन नियुक्त होता है, यह उपबन्ध कर सकेगी कि यदि यथास्थिति राष्ट्रपति या राज्यपाल या राजप्रमुख विशेष अर्हताओं वाले किसी व्यक्ति को सेवा में लाना आवश्यक समझता है तो, यदि करार की हुई कालावधि की समाप्ति से पहले उस पद को समाप्त कर दिया जाता है अथवा उस के द्वारा किये गये किसी अवचार से असम्बन्ध कारणों से उस पद को रिक्त करने की अपेक्षा की जाती है तो उसे प्रतिकर देने के लिए उपबंध किया जाएगा। 282 ख. (1)

हैसियत में नियोजित व्यक्तियों की सिविल सेवा या अखिल भारतीय सेवा का या हैसियत में नियोजित व्यक्तियों की

पदच्युति, पद से हटाया जाना या राज्य की सिविल सेवा का सदस्य है, अथवा संघ वंक्ति में अवनत किया जाना या राज्य के अधीन सिविल पद धारण करता है, वंक्ति में अवनत किया जाना

उसकी नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी के अधीनस्थ किसी प्राधिकारी द्वारा पदच्युत नहीं किया जाएगा या पद से नहीं हटाया जाएगा।

(2) यथा पूर्वोक्त किसी व्यक्ति को जब तक पदच्युत नहीं किया जाएगा, अथवा