अनुच्छेद 282 से 282 (ग) - Page 323

302 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पद से नहीं हटाया जाएगा, अथवा पंक्ति में अवनत नहीं किया जाएगा, जब तक कि उसके बारे में प्रस्थापित की जाने वाली कार्यवाही के खिलाफ कारण बताने को युक्तियुक्त अवसर उसे न दे दिया गया हो; परन्तु यह और किसी खंड में लागू नहीं होगाः

(क) जहाँ कोई व्यक्ति ऐसे आचरण के आधार पर पदच्युत किया जाता है या

पद से हटाया जाता है या पंक्ति में अवनत किया जाता है जिसके लिए

आपराधिक आरोप या उसे दोष सिद्ध किया गया है, या

(ख) जहाँ किसी व्यक्ति को पदच्युत करने या पद से हटाने या पंक्ति में

अवनत करने के लिए सशक्त प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है

कि किसी कारण से, जो उस प्राधिकारी द्वारा लेखवद्ध किया जाउगा,

यह युक्ति -युक्त रूप में साक्ष्य नहीं है कि उस व्यक्ति को कारण बताने

का अवसर दिया जाए; अथवा

(ग) जहाँ राष्ट्रपति या यथास्थिति राज्यपाल या राजप्रमुख का समाधान हो

जाता है कि राज्य की सुरक्षा के हित में यह इष्टकर नहीं है कि उस

व्यक्ति को ऐसा अवसर दिया जाए।

(3) यदि कोई प्रश्न पैदा होता है कि क्या खण्ड (2) के अधीन किसी व्यक्ति को कारण बताने का अवसर देना युक्तियुक्त रूप में साध्य है या नहीं तो ऐसे व्यक्ति को यथास्थिति पदच्युत करने या पद से हटाने अथवा अवनत करने के लिए सशक्त प्राधिकारी का उस पर विनिश्चय अन्तिम होगा।

282ग. (1) इस संविधान के भाग IX में किसी बात के होते हुए भी यदि 282ग.

राज्य परिषद ने उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों की दो तिहाई से

अन्युन संख्या द्वारा समथि्र्ात संकल्प द्वारा घोषित कर दिया है कि राष्ट्रपति

में ऐसा करना आवश्यक या इष्टकर है से संसद विधि द्वारा संघ और

राज्यों के लिए सम्मिलित एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के

सृजन के लिए उपबन्ध कर सकेगी तथा इस अध्याय के अन्य उपबन्धों

के अधीन रहते हुए किसी ऐसी सेवा के लिए भर्ती का, तथा नियुक्त

व्यक्तियों की सेवा की शर्तों का विनियमन कर सकेगी।

(2) इस संविधान के प्रारंभ पर भारत प्रशासनिक सेवा और भारत पुलिस सेवा

नाम से ज्ञात सेवायें इस अनुच्छेद के अधीन संसद द्वारा सृजित सेवायें

समझी जाएँगी।

श्रीमन, इस स्तर पर अपने द्वारा पेश किये गये संशोधन पर मैं कुछ भी कहने का प्रस्ताव नहीं करता हूँ क्योंकि यह अनुच्छेद अपने आप में बिल्कुल स्पष्ट है। यहाँ कई संशोधन हैं जिनसे आलोचना के कुछ मुद्दे खड़े हो सकते हैं और मैं