अनुच्छेद 282-ख - Page 325

304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पहले ही रोका गया है, तो आगे चलना कठिन होगा। हमें फैसला लेने के लिए दूसरे स्थान पर भी जाना है तब यहाँ वापिस आएंगे। यदि सदन ऐसा चाहता है तो हम प्रारूपण समिति की बैठक किसी अन्य समय बदल सकते हैं।

* * * *

* श्री नजीरुद्दीन अहमद : .....यहाँ बहुत से अपराध हैं जैसे अचानक हमला करना, गलत रास्ता बनाना, तकनीकी बेइज्जती और समान बतों जिनको संक्षेप में ऐसे अपराध कहा जाता है जिसमें नैतिक अधमता नहीं है ऐसे सभी मामलों में यदि कार्यालय का स्वामी उसे निकालने की कोशिश करता है तो हमारा पूछना यही है कि उसे कारण बताने का अवसर दिया जाना चाहिए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : सामान्य) : खण्ड (3)को छोड़ने के लिए

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कोई संशोधन नहीं है। आपका संशोधन केवल उप-खण्ड (ख) को छोड़ने का है।

श्री नजीरुद्दीन अहमद : हाँ, मैंने इस संशोधन की सूचना दे दी है संशोधन संख्या 246 देखिये।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : 282ख के खण्ड (3), जो श्री जसपतराय कपूर का है, छोड़ने का एक संशोधन है।

माननीय सभापति : यहाँ एक संशोधन आदरणीय सदस्य (श्री नजीरुद्दीन अहमद) का भी है।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह आगे जा सकता हैं मैं केवल उनका ध्यान आकर्षित करना चाहता था।

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** माननीय सभापति : मैं अब संशोधन को मत के लिए रखूँगा डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना पसन्द करेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं एक या दो शब्द कहना चाहूँगा।

जिन बहुत सदस्यों ने संशोधन पेश किये हैं उन वक्ताओं की मैंने आलोचना सुनी है। इस परिणाम पर पहुंचा हूँ कि वे दो चीजों में स्पष्ट अन्तर नहीं कर सके हैं जो पूर्णतः सुभिन्न व पृथक हैं। ये मामले नौकरी से निकालने के आधार व सूचना देने के आधार के हैं। यह अनुच्छेद 282 (ख) नौकरी से निकालने के बारे में नहीं है। मामले पर कार्यवाही विधानमंडल द्वारा बनाये गये उपयोगी अनुच्छेद 282 के उपबन्धों के

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1104

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1112-1114