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अधीन की जाएगी। असैनिक नौकरियों के लिए नियुक्त एक व्यक्ति किन स्थितियों में नौकरियों से निकाला जाये ये सब मामला होगा जो संसद द्वारा पारित विधि द्वारा ठीक किया जाएगा ऐसी स्थिति से निपटने का अनुच्छेद 282 (ख) का उद्देश्य नहीं है।
जैसा मैंने कहा, यह अनुच्छेद 282 केवल नौकरी से निकालने के नोटिस देने की स्थिति के पहले के बारे में है जिससे कि वह व्यक्ति किसके विरुद्ध कार्यवाही करने का प्रस्ताव है कारण बताने का अवसर प्राप्त कर सकें। इस खण्ड का उद्देश्य एक सामान्य प्रतिपादना लिखना है कि प्रत्येक स्थिति में नोटिस दिया जाएगा लेकिन तीन स्थितियों में जिनका जिक्र तीन उपखण्डों (क), (ख), (ग) में नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है। यही अनुच्छेद कहता है। मेरे अनुसार यह एक बहुत गलत आलोचना हुई है जो मेरे आदरणीय मित्र श्री कामथ द्वारा की गई है कि यह अनुच्छेद संविधान पर एक बुराई अथवा शर्म का काला धब्बा है। श्री एच. वी. कामथ : (गड़बड़ी)
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे सोचना चाहिए था कि कदाचित वह उत्तम उपबंध है जो हमारे लिए गैर-सैनिक सेवा की और सुरक्षा है क्योंकि नौकरी से निकालने के अधिकार पर मौलिक पाबन्दी है। यह कहता है कि कोई आदमी उस समय तक नौकरी से नहीं निकाला जाएगा जब तक उसे यह बताने का अवसर न दिया जाए कि उसे नौकरी से क्यों न निकाला जाए। यदि ऐसा उपबन्ध अशिष्टता की बात है तो मैं औचित्य के उनके अर्थ में अपने मित्र श्री कामथ से मत विभेद रखता हूँ।
श्री एच. वी. कामथ : मैं अनुच्छेद के उपबन्धों का हवाला दे रहा हूँ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं उपबंधों पर आ रहा हूँ। जहाँ तक खण्ड (2) का सम्बन्ध है, मेरे मन में कोई शंका नहीं है कि प्रत्येक व्यक्ति जिसमें सामान्य बुद्धि है सहमत होगा कि वह सबसे अच्छा परन्तु है जिसको उन लोगों की रक्षा के लिए खोजा जा सकता था जो राज्य की असैनिक सेवा में लगे हैं। प्रश्न उठाया गया है कि ऐसे व्यक्ति को जो किसी आपराधिक मामले में सजा पा चुका है नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है। मुझे दुबारा निवेदन करना है कि यहाँ एक गलती हो गई है कि राज्य द्वारा बनाये गये विनियमों में यह प्रावधान किया जा सकता है कि यद्यपि एक व्यक्ति को अपराधिक मामले में सजा हो चुकी है, यदि वह अपराध में नैतिक अधमता नहीं है तो उसे राज्य की नौकरी से हटाने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार के कानून बनाने के लिए संसद पूर्णतः सक्षम है। यह प्रत्येक आपराधिक आरोप में नहीं है उदाहरण के लिए - मोटर चलाने के कानून के अधीन अथवा संसद अथवा राज्य द्वारा बनाई गई विधि के अधीन किसी कृत्य को अपराध बनाये तब यह