अनुच्छेद 283 - Page 329

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

वाँछनीय है तो इसके प्रारंभ करने के मार्ग में उत्पन्न अनेक अड़चनों से बाधित नहीं होनी चाहिए। यदि वे वांछनीय नहीं है तो ऐसा कोई उपबन्ध नहीं होना चाहिए। मैं सोचता हूँ कि अखिल भारतीय नौकरियों की ही अधिक से अधिक प्रवृत्ति होगी, इसलिए मेरे विचार में, इनका आरंभ करना कठिन नहीं होगा। विधान परिषद के उपस्थित व मतदान करने वाले दो तिहाई के वे अन्यून सदस्यों के प्रस्ताव का समर्थन क्यों हो? मैं समझता हूँ कि ये शब्द एकदम अनावश्यक हैं जब तक कि उनका आशय विधान परिषद के व्यर्थ सदन को गरिमा अथवा किसी कार्य से सज्जित करना न हो मैं समझता हूँ कि विधान परिषद को एक महत्वपूर्ण विषय की पहल देने के विषय पर मस्तिष्क की जड़ में यही बेचैनी प्रतीत होती है। इन शब्दों का मुझे कोई उद्देश्य दिखाई नहीं देता इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि उनको निकाल दिया जाए।

माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : केवल एक शब्द। मैं सोचता हूँ श्री बृजेश्वर प्रसाद और मेरे मित्र देशमुख ने संशोधन पेश करने में और दूसरा द्वारों इसका समर्थन करने में, मालूम होता है कि अनुच्छेद 282 के उपबंधों को ध्यान से नहीं पढ़ा है। अनुच्छेद 282 के उपबंधों में लिखा है कि सेवाओं में भर्ती करने का अधिकार जो केन्द्र के अधीन है केन्द्र को होगा और जो व्यक्ति राज्य सेवा में होंगे उनके लिए भर्ती करने और व्यक्तियों के लिए सेवा शर्तें बनाने के लिए राज्य स्वतंत्र होंगे। इसलिए हमने अनुच्छेद 282 के द्वारा पूर्णतः अधिकार क्षेत्र की व्यवस्था की है। किसी हद तक 282 (ग) अनुच्छेद 282 द्वारा राज्य को दी गई स्वायत्तता पर हमला है, ऐसा करने के लिए केन्द्र को कोई अधिकार मिलना चाहिए और ऐसा करने के लिए केवल केन्द्र को अधिकार देने की व्यवस्था मानो अनुच्छेद 282 उच्च सदन के दो तिहाई सदस्यों की स्वीकृति प्राप्त करता है। अनुच्छेद 282 में केवल उच्च सदन का जिक्र किया गया है उच्च सदन राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए उसके प्रस्ताव अनुच्छेद 282 में रखे गये हैं।

(डॉ. अम्बेडकर का प्रस्ताव स्वीकार हुआ। श्री बृजेश्वर प्रसाद का प्रस्ताव अस्वीकार हुआ। अनुच्छेद 282 ख संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 283

* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर हम अनुच्छे 283 पर आते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है “कि संशोधन की सूची

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1119