अनुच्छेद 302 - Page 330

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के संशोधन संख्या 3037 (पुस्तक II ) निम्नलिखित को स्थानापन्न किया जाए :

“कि अनुच्छेद 283 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए - संक्रमणकालीन उपबन्ध 283. जब तक इस संविधान के अधीन इस निमित्त अन्य

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उपबन्ध नहीं किया जाता तब तक इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले प्रवृत्त सब विधियां, जो किसी ऐसी लोक-सेवा या किसी ऐसे पद को, जो इस संविधान के प्रारंभ के पश्चात् अखिल भरतीय सेवा के अथवा संघ या राज्य के अधीन सेवा या पद के रूप में बने रहते है, लागू हों, वहाँ तक प्रवृत्त बनी रहेगी जहाँ तक कि वे इस संविधान के उपबंधों से संगत हो। यह विशुद्ध रूप से संक्रमणकालीन है। (प्रस्ताव स्वीकार हुआ, अनुच्छेद 283 संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 302

माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर, अब हम अनुच्छेद 302 लेते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा प्रस्ताव है “कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (1) के दूसरे परन्तुक में ’भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के विरुद्ध लाई गई ऐसी कार्यवाही जैसी इस संविधान के भाग X के अध्याय III में उल्लिखित है शब्द और अंकों के स्थान पर “भारत सरकार अथवा राज्य सरकार के विरुद्ध उचित कार्यवाही लाये“ शब्द रखे जाएँ“।

“कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (2) में ’राज्यपाल’ शब्द के पश्चात् ’शब्द’ रखा जाय“

“ कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (3) के ’राज्यपाल’ शब्द के पश्चात् ’या’ रखें“

“कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (4) में,

(क) ’राज्यपाल’ शब्द प्रथम स्थान पर जहाँ यह आता है ’या’ शब्द रखे जाएँ।

(ख) ’राज्यपाल’ शब्द दूसरे स्थान में जहाँ यह आता है, ’राज्यपाल या शब्द’

रखे जाएँ, और

(ग) ’राज्यपाल’ शब्द के पश्चात् तीसरे स्थान पर जहाँ यह आते हैं ’या’ शब्द

रखे जाएँ।

एक माननीय सदस्य : श्रीमान 13 के बारे में क्या है?

माननीय सभापति : यह आदेश पत्र में नहीं है। इसे रोक लिया है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : संशोधन संख्या 14, 16, 17 और 18 शुद्ध