अनुच्छेद 302 - Page 331

310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मसौदा संशोधन हैं। कदाचित केवल संशोधन जो स्पष्टीकरण चाहता है संख्या 15 है। इस संशोधन में लाने के कारण है कि अध्याय III वास्तविक अर्थ अनुच्छेद 274 का संदर्भ है। अनुच्छेद 274 सरकार के विरुद्ध बाद के अधिकार के बारे में और अनुच्छेद दो भागों में विभाजित है। एक भाग वाद के अधिकार के बारे में है जैसा कि संविधान के लागू होने की तारीख को विद्यमान है, दूसरा भाग सरकार के विरुद्ध वाद के अधिकार के बारे में दुबारा उपबंध करने की संसद की शक्तियों के बारे में है। यदि ये शब्द वहाँ रहते तो इसका अर्थ केवल यह होगा कि सरकार के विरूद्ध वाद का अधिकार 274 के अनुसार होगा जैसा कि अधिनियम के प्रारंभ की तारीख को होगा। “समुचित कार्यवाहियाँ शब्दों के स्थापना का आशय वाद के अधिकार को समाविष्ट करना ही नहीं है बल्कि अनुवर्ती कार्यवाही को भी जो संसद कानून के द्वारा उस समय की सरकार के विरुद्ध व्यवस्था करती है। इस संशोधन का यही कारण है। मैं सदन में भी यह जिक्र करना चाहूँगा कि मैं देखता हंँ कि यदि यह संशोधन लाया जाता है तो मैं अनुच्छेद 202 में पारिणामिक संशोधन भी लाऊँगा जहाँ एक प्रकार का लोप है।

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* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर, यहाँ श्री कामथ द्वारा पेश किया गया संशोधन है कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (1) में ’कर्त्तव्यों’ शब्द के स्थान पर ‘कृत्य’ शब्द रखा जाए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ’कृत्य’ शब्द एक बड़ा शब्द है और इसमें

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शक्तियाँ तथा कर्त्तव्य सम्मिलित हैं हमने कहा है शक्तियाँ और कर्त्तव्य जिनमें सभी कृत्य आ जाते हैं जो हम रख सकते हैं। इस प्रकार का संशोधन लाना अनावश्यक है। माननीय सभापति : प्रश्न है-

“कि अनुच्छेद 302 के खण्ड (1) में ’कर्त्तव्य’ शब्द के स्थान पर ’कृत्य’ शब्द रखा जाए।

(संशोघन अस्वीकार किया गया।)

माननीय सभापति : यही केवल संशोधन है जिसे पेश किया गया है। डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश किये गये संशोधन को मैं अब रखता हूँ।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1122