अनुच्छेद 302 - Page 332

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श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : सम्पूर्ण समूह एक साथ रखा जा सकता है।

माननीय सभापति : यदि सदस्य चाहते हैं कि मैं उन्हें अलग से रखूंगा बहुत अच्छा, मैं उन्हें एक साथ रखूँगा।

* * * *

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है “कि अनुच्छेद 243 के ऊपर शीर्षक और अनुच्छेद 243, 244 और 245 छोड़ दिये जायें“।

उन्हें रखा जाना चाहिए, जिससे कि दूसरो को अलग से लिया जा सके। यह एक पृथक बात है।

(प्रस्ताव स्वीकार हुआ।)

“अनुच्छेद 243 के ऊपर शीर्षक और अनुच्छेद 243, 244 और 245 निकाले गए।

भाग X- क
भाग

* माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमान, मेरा प्रस्ताव है “कि भाग IX के पश्चात् निम्नलिखित नया भाग रखा जाए, जैसेः-

“भाग X- क
“भाग

भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर व्यपार, वाणिज्य और समागम।

भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र

274क. इस भाग के अन्य उपबन्धों के अधीन रहते हुए भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र व्यापार वाणिज्य और परस्पर व्यवहार अवाध होगा।

व्यापार, वाणिज्य और परस्पर

व्यवहार की स्वतंत्रता

274ख. इस संविधान द्वारा दी गई शक्तियों व्यापार वाणिज्य और परस्पर द्वारा संसद विधि द्वारा एक राज्य और दूसरे राज्य व्यापार वाणिज्य और परस्पर

व्यवहार पर निर्बन्धन लगाने की के बीच अथवा भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भाग व्यवहार पर निर्बन्धन लगाने की

संसद शक्ति के भीतर व्यापार वाणिज्य या परस्पर व्यवहार की

स्वतंत्रता पर ऐसे निर्बन्धन अधिरोपित कर सकेगी जैसे कि लोकहित में अपेक्षित हो।

274ग. (1) इस संविधान के अनुच्छेद 274ख में किसी बात के होते हुए भी सातवीं अनुसूची की सूचियों में ले किसी में व्यायार और वाणिज्य संबंधी किसी प्रविष्टि

*. सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1124