अनुच्छेद 302 - Page 333

312 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

व्यापार और वाणिज्य के के आधार पर संसद को या किसी राज्य के विधानमण् संबंध में संघ और राज्यों डल का,े कोई ऐसी विधि बनाने की शक्ति नहीं होगी की विधायी शक्तियों पर जो एक राज्य को दूसरे राज्य से अधिमान देती है या निर्बन्धन। दिया जाना प्राधिकृत करती है अथवा एक राज्य और निर्बन्धन।

दूसरे राज्य के बीच में कोई विभेद करती है या किया जाना प्राधिकृत करती है।

(2) इस अनुच्छेद के खण्ड (1) में कोई बात संसद को ऐसी कोई विधि बनाने से न रोकेगी जो कोई ऐसा अधिमान देती है या कि दिया जाना प्राधिकृत करती है अथवा कोई ऐसा विभेद करती है या किया जाना प्राधिकृत करती है, यदि ऐसी विधि द्वारा घोषित किया गया कि भारतराज्य क्षेत्र के किसी भाग में वस्तुओं की दुर्लभता से उत्पन्न किसी स्थिति से निपटने के प्रयोजन के लिए ऐसा करना आवश्यक है।

274घ. इस विधान के अनुच्छेद 274 अथवा 274 ग के में किसी बात के होते हुए भी किसी राज्य का विधानमण्डल विधि द्वारा-

राज्यों के बीच व्यापार,

वाणिज्य और परस्पर

व्यवहार पर निर्बन्धन

(क) अन्य राज्यों से आयात किए गए माल पर कोई

ऐसा कर अधिरोपित कर सकेगा जो उस राज्य में विनिर्मित या उत्पादित

वैसे ही माल पर लगता है किन्तु इस प्रकार कि उससे इस प्रकार आयात

की गई वस्तुओं तथा ऐसी विनिर्मित या उत्पादित वस्तुओं के बीच कोई

विभेद न हो, और

(ख) उस राज्य के साथ या भीतर व्यापार, वाणिज्य और परस्पर व्यवहार की

स्वतंत्रता पर ऐसे युक्तियुक्त निर्बन्धन आरोपित कर सकेगा जैसे कि

लोक हित में अपेक्षित हों :

परन्तु खण्ड (ख) के प्रयोजनों के लिए कोई विधेयक या संशोधन राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति के बिना राज्य के विधानमण्डल में पुरःस्थापित या प्रस्तावित नहीं किया जायेगा और राज्यपाल अथवा राजप्रमुख के द्वारा कोई अध्यादेश प्रख्यापित नहीं किया जाएगा।

अनुच्छेद 274-क से

274-घ तक के उपबंधों

274घ. संसद विधि द्वारा ऐसे प्राधिकारी की नियुक्ति कर सकेगी जिसे इस संविधान के अनुच्छेद 274 क, 274

ख, 274 ग, 274 घ के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक समझे और इस प्रकार नियुक्त प्राधिकारी को ऐसी शक्तियाँ प्रदान कर सकेगी और कर्त्तव्य सौंप सकेगी जो वह आवश्यक समझे।“

के प्रयोजनों को कार्यान्वित

करने के प्राधिकारी की

नियुक्ति।