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श्रीमन, इस स्तर पर मैं सदन को सूचित करना आवश्यक समझता हूँ कि मूलतः व्यापार व वाणिज्य की स्वतंत्रता के बारे में कार्य करने वाले अनुच्छेद प्रारूपण समिति के विभिन्न भागों में फैले थे। एक अनुच्छेद को मूल अधिकारों की सूची में स्थान मिला था जैसे अनुच्छेद 16 जिसमें कहा गया था कि व्यापार और वाणिज्य संसद की किसी विधि के अधीन कहते हुए भारत के राज्य सर्वत्र स्वतंत्र होगे। दूसरे अनुच्छेद जैसे 243, 244 और 245 प्रारूपण संविधान के किसी अन्य भाग में सम्मिलित थे। बहस के बीच यह पाया गया कि सदन के बड़ी संख्या में सदस्य अनुच्छेद 243, 244 और 245 समावेश को समझने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि इन अनुच्छेदों को अनुच्छेद 16 से अलग कर दिया गया था। इसलिए सदन को व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता का पूर्ण विवरण देने के लिए प्रारूपण समिति ने महसूस किया कि प्रारूप संविधान में विभिन्न भागों में विखरे सभी अनुच्छेदों को एक भाग में रखना और क्रमवार सम्मिलित करना बहुत अच्छा होगा, ताकि एक दृष्टि से यह जानना संभव हो कि भारत में सर्व स्वतंत्र व्यापार व वाणिज्य के क्या उपबंध हैं। मैं यह भी कहना चाहूँगा कि इस भाग के उपबंधों के अनुसार व्यापार और वाणिज्य को बिल्कुल स्वतंत्र बनाने का उद्देश्य नहीं है, अर्थात् संसद तथा राज्य दोनों को मौलिक उपबंधों से दूर करना है कि व्यापार व वाणिज्य सम्पूर्ण भारत में स्वतंत्र होंगे। कुछ सीमाओं के अधीन रहते हुए व्यापार और वाणिज्य को स्वतंत्र बनाया गया है, जो संसद अथवा विभिन्न राज्यों के द्वारा लादी जायेगी, इस तथ्य के अधीन है कि संसद की शक्तियों में सीमायें स्वतंत्र व्यापार व वाणिज्य भारत क्षेत्र में माल की कमी से उत्पन्न होगी और राज्यों के मामले में लोकहित से उचित होनी चाहिए। व्यापार और वाणिज्य पर हमला करने की राज्य की कार्यवाही लोकहित में इस बसत के अधीन होगी कि कोई विधि जो व्यापार व वाणिज्य की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगी, राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति प्राप्त करेगी, अन्यथा राज्य इस प्रकार की विधि बनाने की स्थिति में नहीं होगा। अनुच्छेद 274 घ एक मात्र ऐसा अनुच्छेद है जो संसद को अंतर्राज्यीय आयोग बनाने के योग्य बनाता है जैसा कि संयुक्त राज्यों में होता है। इस प्रकार के अधिकारी के खासतौर पर बताये बिना यह वांछनीय समझा गया कि इसे अनिश्चितता की स्थिति में छोड़ा जाये जिससे संसद स्वतंत्र रूप से किसी प्रकार का प्राधिकरण स्थापित कर सके जैसा वह उचित समझे।
यदि बहस के दौरान कोई बिन्दु उठाए जाते हैं, तो आवश्यक स्पष्टीकरण देने में मुझे प्रसन्नता होगी।