अनुच्छेद 264 - Page 335

314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 274क

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति जी, मैं नहीं समझता कि मेरे आदणीय मित्र श्री टी. टी. कृष्णामचारी और भी अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर ने जो पूछा है उसमें कुछ जोड़ना लाभदायक हो सकता है।

(सभी 3 संशोधन अस्वीकार किए गए अनुच्छेद 274क संविधान में जोड़ा गया।)

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अनुच्छेद 264

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (बम्बई : सामान्य) : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :

“कि अनुच्छेद 264 के स्थापन पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :

’264 (1) राज्य द्वारा अथवा राज्य में किसी प्राधिकरण द्वारा लगाए जाने वाली

सभी करों से संघ की संपत्ति मुक्त होगी।

(2) इस अनुच्छेद के खंड (1) में कोई बात जब तक कि संसद विधि द्वारा

अन्यथा उपबंध न करे, राज्य में किसी स्थानीय प्राधिकरण को संघ की

संपत्ति पर कर अधिरोपित करने से नहीं रोकेगी जो उस राज्य में इस

संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्व देय था। अथवा देय माना जाता था जब

तक बढ़कर उस राज्य में उद्ग्रहीत होता रहेगा।’“

यदि कोई बहस होती है, तो मैं संशोधन पेश होने के पश्चात बोलूँगा।

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** पंडित लक्ष्मीकांत मैत्रा : .......1941 के अधिनियम के अनुसार, यदि इस आशय की सरकार द्वारा अधिसूचना है तो नवीकरण कर स्थानीय कर का संग्रहण किया जा सकता है। लेकिन कर रूपांतरित रूप में होंगे उसकी कसौटी होगी की गई सेवा।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आपने पांच मिनट से अधिक ले लिए हैं।

* श्री चिमनलाल चाकूभाई शाह : .... इसलिए मैं डॉ. अम्बेडकर से निवेदन

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1153

** ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 8 सितम्बर, 1949, पृ. 1153