अनुच्छेद 264 - Page 336

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करूँगा कि दो मुद्दों पर विचार करें जैसे (1) क्या अनुच्छेद 266 में यह आवश्यक नहीं है.....

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : फिलहाल, हम अनुच्छेद 264 पर विचार कर रहे हैं। जब हम अनुच्छेद 266 पर आएंगे तो तब उस पर विचार होगा।

* * * *

** माननीय सभापति : विचारधारा सदन के सम्मुख प्रस्तुत की जा चुकी है। डॉ. अम्बेडकर, क्या आप बहस का उत्तर देंगे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं पहले प्रस्तावित अनुच्छेद 264 के

खंड (2) के उपबंधों का उल्लेख करूँगा। मैं समझता हूँ इस बारे में सहमति होगी कि इस खंड (2) का उद्देश्य यथापूर्व स्थिति बनाए रखना है। परिणामस्वरूप खंड (2) के उपबंधों के अधीन जो नगरपालिकाएं संविधान के ठीक लागू होने से पूर्व संघ की संपत्ति पर कर लगा रही थी अथवा जो कर लगाने योग्य थे अथवा योग्य समझी जाती थी, उन करों को लगाना जारी रखेगी। जो सब कुछ खंड (2) करता है वह यह है कि संसद को कर की प्रकृति जांचने का अधिकार है जो इस समय लगाए जा रहे हैं। इससे कुछ भी अधिक खंड (2) में नहीं है सिवाय व्यावृत्ति खंड के कि ’जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे।’ जब कि संसद अन्यथा स्थानीय प्राधिकरण की उपस्थिति की व्यवस्था नहीं करती, चाहे वह नगरपालिका हो अथवा स्थानीय बोर्ड केंद्र की संपत्ति पर कर लगाना जारी रखेंगे। इसलिए जहाँ तक यथा पूर्व स्थिति का संबंध है, अनुच्छेद 264 के उपबंधों से कोई झगड़ा नहीं हो सकता।

केवल प्रश्न जो उठ सकता है वह यह है कि क्या खंड (2) द्वारा दिए गए अधिकार पूर्ण हों अथवा उसमें अंतर्विष्ट परंतुक के अधीन हो जब कि संसद अन्यथा उपबंध न करे। एक दूसरे स्थान पर जहाँ इस विषय पर बहस हुई थी, सदन के विचारार्थ मैंने कुछ तर्क निवेदित किए थे।

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पंडित हृदयनाथ कुंजरू (संयुक्त प्रांत : सामान्य) : जिस अन्य स्थान का मेरे मित्र

जिक्र कर रहे हैं कौन-सा है? क्या सभा का कोई अन्य सदन है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह जिक्र करने योग्य नहीं है। क्योंकि जो तर्क मैंने प्रस्तुत किए वहाँ गलत ढंग से प्रस्तुत किए गए। मैं समझता हूँ कि वे

* ख्., वही पृ. 1155

** ख्., वही पृ. 1157-1160