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316 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सदन को प्रभावित करने में सफल नहीं हुए और इसलिए मैं अपने तर्कों को दुहराना पसंद करूंगा क्योंकि वे मेरे अपने हैं, और मैं सदन के समक्ष इस प्रकार दुहराऊँगा कि सदन उनको समझ सके।

तब मैंने कहा था कि बिना किसी प्रकार की सीमा या शर्त के संघ की संपत्ति पर स्थानीय संस्थाओं को कर लगाने की पूर्ण शक्तियाँ देना कठिन है और तर्क द्वि मुखी थे। सबसे पहले, मैंने कहा था और अब कहता हूँ कि सैद्धांतिक तौर पर किसी व्यक्ति की किसी संपत्ति को जिसका प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है अथवा जिसके हितों का प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा है सोचना असंभव है उस को उस संगठन को किसी कर का उद्ग्रहण करने और सीमारहित अधिकार ऐसे व्यक्तियों की संपत्ति देना असंभव है। यह सिद्धांत प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के विरुद्ध है और मैंने कहा था कि जहाँ तक स्थानीय प्राधिकरणों का संबंध है, चाहे वे नगरपालिका हो अथवा स्थानीय अथवा जिला बोर्ड, इन संस्थाओं में व्यावहारिक तौर पर केंद्र का कोई प्रतिनिधि नहीं होता। अन्य स्थानों पर भी मैंने यही बात कही थी। दूसरे मैंने कहा था कि स्थानीय निवास का कर लगाने का प्राधिकरण स्थानीय कानून बनाने वाली संस्था को राज्य के विधानमंडल की विधि से निकला है। केंद्र के लिए यह जानना बिल्कुल असंभव है कि कर लगाने का विशेष स्रोत जो संविधान द्वारा राज्य विधानमंडल को दिया गया है राज्य विधानमंडल द्वारा स्थानीय प्राधिकरण को अंतरित कर दिया जाएगा। आखिकार स्थानीय प्राधिकरण की कर लगाने की शक्ति राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए कानून से निकलती है। वर्तमान में यह जानना बिल्कुल असंभव है कि केंद्र सरकार की जायदाद पर विशेष कर लगाने के लिए राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्थानीय संस्था को प्राधिकृत किया जा सकता है। परिणामस्वरूप, यह न जानना कि कर की प्रकृति क्या होगी कर कहाँ तक लगेगा केंद्र सरकार कर की प्रकृति जाने बिना कर की मात्रा की प्रकृति जाने बिना अपने आप कर स्थानीय निकाय के प्राधिकार के सामने अभ्यर्पण करने की प्रत्याशा करना असंभव है। यही कारण है कि खंड (2) में यह आरक्षण करने का प्रस्ताव है कि स्थानीय प्राधिकरण की कर लगाने की शक्ति का परीक्षण करने का अधिकार संसद को होना चाहिए, कर की सीमा जो लगाने के लिए यह प्रस्ताव करती है संसद कर लगाने के लिए उसकी संपत्ति पर स्थानीय प्राधिकरण या कर लगाए जाने के लिए मैंने सुनने से पूर्व जांच पड़ताल करने का अवसर मिलना चाहिए नहीं जैसा मैंने कहा था कि संसद की ओर से लेश मात्र भी इरादा नहीं है अथवा उनकी ओर से जिन्होंने इस अनुच्छेद का प्रस्ताव किया है कि संसद जब अपने प्राधिकार का प्रयोग करती है जो उसे खंड (2) द्वारा प्रदत्त है तो स्थानीय प्राधिकरण द्वारा लागए गए करों से अपने आप को पूर्णतः मुक्त रखने के लिए वह मुक्त रखेगी। केवल कारण जिससे यह परंतुक लागू किया गया है वह कर