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लगाने के निवेदन करने के बुलाने के पहले कर लगाने के प्रस्ताव के परीक्षणों का एक अवसर संसद को देने की आज्ञा देना है। मैं नहीं समझता कि यहाँ कोई गंदगी है। जहाँ तक खंड (2) का संबंध है, दूसरे, खंड (2) वित्तीय संसाधनों के द्वारा किसी वस्तु को अब नहीं लेता जो अब स्थानीय प्राधिकरणों के पास है।

तो भी यहाँ एक मुद्दा है जिसे मैंने अब खोला है जो खंड (1) में कमी जैसा है जिसे मैं ठीक करने के लिए तैयार हूँ। खंड (2) उन नगरपालिकाओं अथवा स्थानीय प्राधिकरणों के बारे में है जो कर नहीं लगाती है। यह अधिकार उन नगरपालिकाओं को नहीं दिया जाना चाहिए अथवा उन स्थानीय प्राधिकारणों को नहीं दिया जाना चाहिए जो उस अधिकार का प्रयोग कर रही हैं, लेकिन संसद को भी उन नगरपालिकाओं और स्थानीय बोर्डों को कर लगाने का विशेष अधिकार केंद्र की संपत्ति का देना चाहिए जिन्होंने उस शक्ति का प्रयोग अब तक नहीं किया है अथवा ऐसा करने में असफल रहे हैं। इसलिए इन शब्दों को मैं खंड (1) में समाविष्ट करने के लिए तैयार हूँ। ’संघ की संपत्ति होगी’ शब्दों के पश्चात् ’सिवाय वहाँ तक जहाँ तक संसद विधि द्वारा अन्यथा व्यवस्था उपबंध करे’ शब्द जोड़े जाएँ।

अभिप्राय यह है कि यह संसद को शक्ति प्रदान करने की अथवा दूसरी नगरपालिकाओं तथा दूसरे स्थानीय बोर्ड द्वारा लगाए गए करों को मान्यता देने की अनुज्ञा जिनको अब तक मान्यता प्राप्त नहीं हुई है। मैं सोचता हूँ कि यह कमी है जिसको सही करने के लिए मैं तैयार हूँ जिससे उन स्थानीय प्राधिकरणों में भेदभाव न हो जो कर लगा रही हैं और जो कर नहीं लगा रही हैं। संसद इसके लिए स्वतंत्र होगी कि यहाँ तक कि संविधान पारित हो जाने के पश्चात् भी वह उन स्थानीय प्राधिकरणों और नगरपालिकाओं को कर लगाने की अनुज्ञा देने के लिए कानून बनाए जो अब तक कर नहीं लगा रही हैं। मैं इसके बाहर जाने के लिए तैयार नहीं हूँ।

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अधीन भी नगरपालिकाओं को केंद्र सरकार की इमारतों पर कर लगाने की अनुज्ञा नहीं थी।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यह वही है जो मैंने कहा था। मैं वाद-विवाद

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को विस्तृत कर सकता था लेकिन मैं ऐसा करना नहीं चाहता क्योंकि मैंने स्वीकार किया है कि यथापूर्व स्थिति कायम रखी जानी चाहिए। शुद्ध संवैधानिक विचार से

खंड (2) के मेरे पास बहुत बड़ा एतराज है और मैं ऐसा नहीं होने दूंगा, लेकिन हम बेदाग नहीं हैं, हमने इस पर बहुत लिखा है और इसलिए मैं नहीं चाहता कि जो लिखा है उसे नष्ट कर दूं। यही वह कारण है जिससे खंड (2) हैं और खंड (1) को थोड़ा उपांतरित कर संसद को अनुज्ञा दें कि वह उन नगरपालिकाओं को जो