324 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है कि हम प्रांतों को कोई हानि नहीं पहुँचा रहे हैं क्योंकि यदि सदन मेरे संशोधन संख्या 374 को लेने के लिए तैयार होगा तब प्रदेश समाचार पत्रों की बिक्री पर कर का वह भाग पाएगा जो उन्होंने संगष्हीत किए हों और अब संशोधन संख्या 374 के अधीन प्राप्त कर रहे हैं।
इन प्रस्तावों को बनाने में हमने इस सामान्य प्रतिपादन को ध्यान में रखा है कि समाचार पत्र मूल अधिकारों से संबद्ध होने के कारण केंद्र की अधिकारिता में आगे चाहिए और यह कि कोई वित्तीय अभिलाभ, जिसे प्रांत प्राप्त करते, अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। यही दोनों बातें इन परिवर्तनों को करने में प्रारूपण समिति पर अभिभावी रही हैं।
अपने मित्र श्री सिधवा की घोषणा के होते हुए भी जिसे मैं समझ सकता हूँ मेरा निवेदन है कि चूंकि वह बड़ी क्षति से उबर रहे हैं। जो उन्हें किसी दूसरी जगह पहुंची थी मैं कहता हूँ कि जो प्रविष्टियां हमने प्रस्तावित की हैं उन पर कोई एतराज नहीं हो सकता।
श्री आर. के. सिधवा : श्रीमन, मुझे डॉ. अम्बेडकर का इस टिप्पणी पर आपत्ति है कि मैं किसी क्षति से उबर रहा हूँ। मैं उनका हिसाब उनके ही शब्दों में चुकता करूंगा। जब तक आप इस टिप्पणी को वापिस लेने के लिए नहीं कहते।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, उनको वापिस लेने के लिए मैं पूर्णतः तैयार हूँ लेकिन मैं इसे बहुत अच्छी तरह जानता हूँ।
माननीय सभापति : यह मामला यहीं समाप्त होता है।
(डॉ. अम्बेडकर का मूल संशोधन जैसा ऊपर दिखाया गया है। स्वीकार हुआ और दूसरे संशोधन खारिज कर दिए गए। प्रविष्टि 58 तथा 58क संशोधित रूप में राज्य सूची की सातवीं अनुसूची में जोड़ी गयी।)
अनुच्छेद 250
श्री टी.टी. कृष्णमाचारी : डॉ. अम्बेडकर इसे पहले ही पेश कर चुके हैं। यह वैसे ही केवल औपचारिक मामला है और इसे मत के लिए रखा जा सकता है।
माननीय सभापति : क्या डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश किए गए संशोधन संख्या 374 के बारे में कोई कुछ कहना चाहता है?
(कोई सदस्य नहीं उठा।)
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, यह पारिणामिक कार्यवाही है।