326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय पंडित ठाकुरदास भार्गव (पूर्वी पंजाब : सामान्य) : आप समुचित मामलों में क्या
कहते हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्योंकि समुचित मामले संसद की विधि द्वारा अधिकथित होंगे।
(संशोधन स्वीकार किया गया।)
अनुच्छेद 234-क
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि अनुच्छेद 234 के पश्चात निम्नलिखित नया अनुच्छेद रखा जाए :
रेलों की संरक्षा के लिए राज्यों पर संघ का नियंत्रण भीतर रेलों की संरक्षा करने के उपाय करने संबंधी कार्य करने के निदेश राज्यों को देने तक होंगे। ’234-क. (1) संघ की कार्यपालिका शक्तियाँ राज्य के रेलों की संरक्षा के लिए
नियंत्रण
(2) इस अनुच्छेद के खण्ड (1) के अधीन दिए गए निदेश के कारण उस धन से अधिक धन व्यय होता है जो राज्य द्वारा साधारणतौर पर कर्त्तव्य निभाने के लिए राज्य को करने होते यदि इस प्रकार का निदेश न हुआ होता, राज्यों को भारत सरकार द्वारा अदा किया जाएगा जिस पर करार पाया जाएगा अथवा करार के अभाव में राज्य द्वारा इस प्रकार उपगत अतिरिक्त खर्च के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नियुक्त मध्यस्थ द्वारा अवधारित की जाएगी।’“
श्रीमन, सबसे पहले सभी पुलिस राज्य सूची में हैं। पारिणामिक रेल सम्पत्ति की रक्षा भी प्रांतीय सरकार के क्षेत्र में आती है। यह महसूस किया गया था कि कुछ विशेष मामलों में केंद्र वांछा कर सकता है कि विशेष उपायों द्वारा राज्य द्वारा रेल सम्पत्ति की रक्षा की जाए और इस उद्देश्य के लिए केंद्र अब वह शक्ति प्राप्त करना चाहता है जिससे उस निमित्त निदेश कर सके। यह संभव है कि केंद्र द्वारा निदेश करने से राज्यों द्वारा साधारण से कुछ अधिक खर्च करना पड़े। ऐसी दशा में, जो अतिरिक्त खर्च पड़ेगा वह या तो सहमति से निश्चित होना चाहिए अथवा यदि यहाँ कोई सहमति नहीं है, तो भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा चुने गए मध्यस्थ द्वारा तय होनी चाहिए दूसरा खण्ड बहुत से खण्डों के सदृश है जिनको हमने जहाँ तक अतिरिक्त खर्च का संबंध है केंद्र व राज्यों के बीच के झगड़े सुलझाने के लिए पहले ही पारित कर दिया है।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 9 सितम्बर, 1949, पृ. 1185-1186