अनुच्छेद 234-क - Page 348

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डॉ. पी.एस. देशमुख : सभापति जी, जो उपबंध रेल संपत्ति के बारे में है, उसकी आवश्यकता से मैं संतुष्टि महसूस नहीं करता।

श्री बृजेश्वर प्रसाद : सभापति जी, मैं इस अनुच्छेद के खण्ड (1) का हृदय से समर्थन करने के लिए खड़ा होता हूँ लेकिन मैं खण्ड (2) के पूर्णतः विरुद्ध हूँ ...... इसलिए मैं चाहता हूँ कि जहाँ तक खर्च का संबंध है यदि केंद्र अथवा राज्य के बीच कोई विवाद होता है तो मामला पूरी तरह राष्ट्रपति को सौंप दिया जाए।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, यह खण्ड बहुत आवश्यक है। जब

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मेरे मित्र देशमुख ने यह कहा कि मौजूद अनुच्छेद में बहुत से उपबंध हैं जिन्हें हमने पारित किया था तो मुझे यह कहते हुए दुःख होता है कि वह मौलिक रूप से भूल कर रहे हैं। रेल पुलिस भी राज्य सरकार का विषय है। पुलिस एक प्रविष्टि के रूप में सूची I में नहीं है। परिणामस्वरूप, केंद्र को बिल्कुल भी किसी पुलिस के विषय में कानून बनाने का अधिकार नहीं है, न कोई कानूनी प्राधिकार है और न कार्यपालक अधिकार है। इसलिए जहाँ तक रेल संपत्ति की संरक्षा का प्रश्न है मामला पूरी तरह राज्य की कार्यपालक प्राधिकार में है। ऐसा होने से, इसे करने के केवल दो तरीके हैं। या तो केंद्र को अपनी संपत्ति की संरक्षा करने के लिए पुलिस अधिकार दे दिया जाए, ऐसी दशा में, एक अनुच्छेद जैसा मैंने पेश किया है अनावश्यक है अथवा हमें एक उपबंध लाना चाहिए जिसका मैंने सुझाव दिया है अर्थात निदेश देना। मान लीजिए कि रेल संपत्ति की संरक्षा के लिए केंद्र पुलिस रखनी है उस पुलिस का राज्य पुलिस से सदैव झगड़ा रहेगा इसलिए उस स्कीम से दोहरा अधिकार क्षेत्र दूर कर दिया गया है जिसका सुझाव दिया है अर्थात् केंद्र को निदेश देने का प्राधिकार होना चाहिए कि रेल में अधिक पुलिस लगाई जाए। बेहतर सावधानियाँ बरती जाएं ताकि यहाँ कोई मतभेद न हो और यदि अधिक व्यय करना हो तो केंद्र उसे वहन करने के लिए तैयार रहे। मुझे यहाँ कोई कठिनाई नहीं दिखाई देती। डॉ. देशमुख का विचार कि यह मामला पहले आ चुका है निराशाजनक ढंग से गलत है।

डॉ. पी. एस. देशमुख : कारण क्या है कि जहाँ तक केंद्र की दूसरी संपत्ति का संबंध है हम कोई रखवाली आवश्यक नहीं समझते? आप रेल और दूसरी संपत्ति में अंतर क्यों करते हैं?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्यांकि रेल संपत्ति अधिक ध्यान चाहती है।

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वहाँ यात्रियों की सुरक्षा भी है।

(डॉ. अम्बेडकर का उपबंध स्वीकार हुआ। नया अनुच्छेद 234-क संविधान में जोड़ा गया।)