नया अनुच्छेद 242-क - Page 349

328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नया अनुच्छेद 242-क

* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर आपको शीर्षक के संबंध में संशोधन संख्या 272-क पेश करना चाहिए।

श्री टी. टी. कृणमाचारी : यदि सं. 373 पारित होता है तो शीर्षक का विलोप पारिणामिक है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैं संशोधन सं. 373 पेश करता हूँः “कि अनुच्छेद 242 के पश्चात् नया अनुच्छेद रखा जाए :

अंतर्राज्यीय नदियों या नदी घाटियों के जल

संबंधी वादों का न्याय

242क. (1) संसद विधि द्वारा किसी अंतर्राज्यीय नदी या नदी घाटियों के या जलों के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण के बारे में किसी विवाद या फरियाद के न्याय निर्णयन के लिए उपबंध कर सकेगी।

निर्णयन

(2) इस संविधान में किसी बात के होते हुए भी संसद विधि द्वारा उपबंध कर सकेगी कि न तो उच्चतम न्यायालय और न अन्य कोई न्यायालय खण्ड (1) में निर्दिष्ट किसी विवाद या फरियाद के बारे में क्षेत्राधिकार का प्रयोग करेगा।

श्रीमन, मौलिक रूप में इस अनुच्छेद में राष्ट्रपति की कार्यवाही की व्यवस्था थी। यह सोचा गया था कि ये पानी आदि के बारे में वाद-विवाद बहुत कम होंगे और तदनुसार उनकी समाप्ति किसी विशेष मशीनरी द्वारा होनी चाहिए जिसकी नियुक्ति की जानी चाहिए। लेकिन इन तथ्यों की दृष्टि से कि हम बहुत से निगम बना रहे हैं और इन निगमों को संपत्ति और दूसरी वस्तुएं लेने की शक्तियां प्रदान की जाएंगी, बहुत से वाद-विवाद खड़े होंगे और तदनुसार इन प्रश्नां का निपटारा करने के लिए स्थाई संस्था नियुक्त करने की आवश्यकता होगी। तदनुसार यह महसूस किया गया था कि मूल मसौदा अथवा प्रस्ताव गति रोकने वाला था अथवा किसी लचीली कार्यवाही की आज्ञा देने के लिए बहुत स्टैरियो टाइप थी कि वह बैठक के लिए इन समस्याओं से आवश्यक होगी तदनुसार मैं यह नया अनुच्छेद प्रस्ताव कर रहा हूँ जो इन झगड़ों को निश्चित करने के लिए कानून बनाने के लिए संसद पर छोड़ते हैं।

श्री आर. के. सिधवा : अनुच्छेद 242 को विलुप्त का प्रस्ताव है, और यह नया अनुच्छेद 242-क अनुच्छेद 242 के पश्चात्! कैसे आता है?

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 9 सितम्बर, 1949, पृ. 1187