संशोधन संख्या 372-क - Page 351

330 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(क) यथास्थिति, भारत सरकार या राज्य की सरकार द्वारा जुटाए गए या

प्राप्त राजस्व या लोक धनराशियों से भिन्न हैं, और संघ या किसी राज्य

के कार्यकलाप के संबंध में नियोजित किसी अधिकारी को उसकी उस

हैसियत में, या

(ख) किसी वाद, विषय, लेखे या व्यक्तियों के नाम में जमा भारत राज्यक्षेत्र

के भीतर किसी न्यायालय की, प्राप्त होती है या उसके पास निक्षिप्त की

जाती है, यथास्थिति, भारत के लोक लेखे में या राज्य के लोक लेखे में

जमा की जाएगी।

श्रीमन, यदि आप मुझे इजाजत दे तो मैं दूसरे संशोधन भी पेश करूंगा तब हम जो परिवर्तन करना चाहते हैं उन्हें समझने में सदस्यों को समर्थ बनाने के लिए कुछ आम बातें आपके सामने रखूंगा।

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माननीय सभापति : हाँ।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं संशोधन संख्या 380 और 381 पेश करता

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हूँ। मेरा प्रस्ताव है :

“कि अनुच्छेद 284-क के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :

248क.- भारत और राज्यों की संचित निधियां और लोक लेखे -

24 8d

(1) संविधान के 248 के उपबंधों के तथा कुछ करों और शुल्कों के शुद्ध

आगम पूर्णतः या भागतः राज्यों को सौंप दिए जाने के संबंध में इस

अध्याय के उपबंधों के अधीन रहते हुए, भारत सरकार को प्राप्त सभी

राजस्व, उस सरकार द्वारा राज हुंडियां निर्गमित करके, उधार द्वारा या

अर्थोपाय अग्रिमों द्वारा लिए गए सभी उधार और उधारों के प्रति संदाय में

उस सरकार को प्राप्त सभी धनराशियों की एक संचित निधि बनेगी जो

’भारत की संचित निधि’ के नाम से ज्ञात होगी तथा किसी राज्य सरकार

को प्राप्त सभी राजस्व, उस सरकार राज हुंडियां निर्गमित करके, उधार

द्वारा अर्थोपाय अग्रिमों द्वारा लिए गए सभी उधार और उधारों के प्रति

संदाय में उस सरकार को प्राप्त सभी धनराशियों की एक संचित निधि

बनेगी जो ’राज्य की संचित निधि’ के नाम से ज्ञात होगी।

(2) भारत सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा या उसकी ओर से प्राप्त

सभी अन्य लोक धनराशियां, यथास्थिति, भारत के लोक लेखे में या राज्य

के लोक लेखे में जमा की जाएगी।