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(3) भारत की संचित निधि या राज्य की संचित निधि में से कोई धनराशियाँ
विधि के अनुसार तथा इस संविधान में उपबंधित प्रयोजनों के लिए और
रीति से ही विनियोजित की जाएगी अन्यथा नहीं।
संशोधन की संख्या 381
| a'k | ksèk |
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| d | h |
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“कि अनुच्छेद 263 के स्थान पर निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए :
263(1). संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखाओं में जमा धनराशियों की अभिरक्षा आदि -
(1) भारत की संचित निधि और भारत की आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा,
ऐसी निधियां में धनराशियों के संदाय, उनसे धनराशियों के निकाले
जाने, ऐसी निधियों में जमा धनराशियों से भिन्न भारत सरकार द्वारा या
उसी ओर से प्राप्त लोक धनराशियों की अभिरक्षा, भारत के लोक लेखे
में उनके संदाय और ऐसे लेखे से धनराशियों के निकाले जाने का तथा
पूर्वोक्त विषयों से संबंधित या उनके आनुषंगिक अन्य सभी विषयों का
विनियमन संसद द्वारा बनाई गई विधि द्वारा किया जाएगा और जब तक
इस निमित इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक राष्ट्रपति
द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा किया जाएगा।
(2) राज्य की संचित निधि और राज्य की आकस्मिकता निधि की अभिरक्षा,
ऐसी निधियों में धनराशियों के संदाय, उनसे धनराशियों के निकाले जाने,
ऐसी निधियों में जमा धनराशियों से भिन्न राज्य की सरकार द्वारा या
उसकी ओर से प्राप्त लोक धनराशियों की अभिरक्षा, राज्य के लोक लेखे
में उनके संदाय और ऐसे लेखे से धनराशियों के निकाले जाने का तथा
पूर्वोक्त विषयों से संबंधित या उनके आनुषंगिक अन्य सभी विषयों का
विनियमन राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि द्वारा किया जाएगा
और जब तक इस निमित इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब
तक राज्य के राज्यपाल द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा किया जाएगा।
संक्षेप में, परिवर्तन दो प्रकार के हैं। मूल अनुच्छेद संख्या 248-क में जैसा यह है संचित निधि का क्षेत्र सीमित है। संचित निधि में विनिर्दिष्ट तौर पर ऋणों के आगम, खजाना हुण्डियां और अग्रिमधन राशियों के अर्थोपाय का निर्देश नहीं करती। अब हम उनके विनिर्दिष्ट जिक्र करने का प्रस्ताव करते हैं जिससे कि वे संचित निधि का भाग बन सकें।
दूसरी बात है कि संचित निधि की परिभाषा करते समय इसके साथ हमने दूसरी