नया अनुच्छेद 112-ख - Page 355

334 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय कुछ दशाओं में वर्तमान विधि के अधीन

सम्राट के सपरिषद अधिकारिता और उपबंध न करे अध्याय के पिछले उपबंधों में सम्राट के सपरिषद अधिकारिता और

शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्दिष्ट विषयों को छोड़कर, अन्य विषयों में शक्तियों का उच्चतम न्यायालय द्वारा

प्रयोग किया जाना। अधिकारिता तथा शक्तियाँ उच्चतम न्यायालय प्रयोग किया जाना।

को प्राप्त होंगी जिनके संबंध में अधिकारिता और शक्तियाँ किसी भी वर्तमान विधि के अधीन इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पूर्व सपरिषद सम्राट द्वारा प्रयोक्तव्य थीं।

श्रीमन, स्थिति यह है कि प्रिवी कौंसिल के विनिर्णय के अनुसार सिविल मामलों और आयकर मामलों में अंतर है और उदाहरण के लिए जैसे अर्जन कार्यवाही। यह अविनिर्धारित किया जा चुका है कि आयकर और संपत्ति अर्जित करने की कार्यवाही उसके अंतर्गत नहीं आती जिसे ’सिविल कार्यवाही’ कहा जाता है। और इसलिए यह माना जाना चाहिए कि यदि विशेष उपबंध न किया गया होता तो उच्चतम न्यायालय की कार्यवाही सिविल कार्यवाही होती इस संदेह को दूर करने के लिए अनुच्देद 112-ख पुरःस्थापित करने का प्रस्ताव है जिससे कि उच्चतम न्यायालय को सभी प्रकार की कार्यवाहियों में पूरी शक्तियांँ दे दी जाएँ जिसमें सिविल कार्यवाहियाँ तथा अन्य कार्यवाहियाँ जो सिविल प्रकृति की नहीं हैं इसी कारण इस अनुच्छेद को पेश किया जाना ईप्सित है।

* माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर क्या आप कुछ कहना चाहेंगे?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरे मित्र पं. ठाकुरदास भार्गव के संशोधन के बारे में मैं नहीं समझता कि यह संशोधन आवश्यक है क्या वह वास्तव में न्यायालय का क्षेत्राधिकार बढ़ा रहे हैं। ’अभ्यास’ शब्द साधारणतः पद्धति के मामले को पूरा करने के लिए किया जाता है और अनुच्छेद 112-ख जिसका प्रस्ताव मैंने किया है प्रक्रिया के बारे में नहीं है बल्कि क्षेत्र को स्वतंत्रता के बारे में है। इसलिए उनका संशोधन ’अथवा पद्धति’ अनावश्यक है।

मेरे मित्र श्री शिब्बनलाल सक्सेना के संशोधन के बारे में दो मुद्दे हैं जिनका मैं उत्तर देना पसंद करूँगा। पहला यह है कि यदि सेना न्यायालय द्वारा पारित मृत्यु दण्ड की सजा की अपील उच्चतम न्यायालय में की जानी है तो यह अनुच्छेद अभियुक्त व्यक्ति को अपील का अधिकार देने के लिए भारतीय सेना अधिनियम के द्वारा इस प्रकार का उपबंध आसानी से किया जाना चाहिए और इसकी व्यवस्था की गई है, यदि मैं अपने मित्र का ध्यान अनुच्छेद 114 के खण्ड (1) की ओर आकर्षित

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 14 सितम्बर, 1949, पृ. 1496