336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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नया अनुच्छेद 15-क
माननीय सभापति : तब हम वापिस नए अनुच्छेद 15-क पर जाते हैं। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :
“कि अनुच्छेद 15 के पश्चात निम्नलिखित अनुच्छेद रखा जाए : कुछ दशाओं में गिरफ्तारी 15क(1) किसी व्यक्ति को जिसे गिरफ्तार किया गया है, और निरोध से संरक्षण ऐसी गिरफ्तारी के कारणों से यथाशीघ्र अवगत कराए बिना कुछ दशाओं में गिरफ्तारी
हिरासत में नहीं रखा जाएगा और न ही रुचि के विधि
व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा कराने के अधिकार से वंचित नहीं रखा जाएगा।
(2) प्रत्येक व्यक्ति को, जो गिरफ्तार करके हिरासत में रखा गया है, गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय तक यात्रा के लिए आवश्यक समय को छोड़कर ऐसी गिरफ्तारी से चौबीस घंटे की अवधि में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा और ऐसे किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के प्राधिकार के बिना उक्त अवधि के लिए हिरासत में नहीं रखा जाएगा।
(3) इस अनुच्छेद की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को लागू नहीं होगी जो -
(क) तत्समय शत्रु अन्य देशीय है; या
(ख) निवारक निरोध का उपबंध करने वाली किसी विधि के अधीन गिरफ्तार
या हिरासत में लिया गया हैः
परन्तु, निवारक निरोध का उपबंध करने वाली कोई विधि किसी व्यक्ति का तीन मास से अधिक अवधि के लिए तब तक हिरासत में रखा जाना प्राधिकृत नहीं होगा, जब तक कि-
(क) ऐसे व्यक्तियों से, जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं या न्यायाधीश
नियुक्त होने के लिए अर्हित हैं, मिलकर बने सलाहकार बोर्ड ने तीन
मास की उक्त अवधि की समाप्ति से पहले यह प्रतिवेदन नहीं दिया है
कि उसकी राय में ऐसे निरोध के लिए पर्याप्त कारण हैं।
(ख) ऐसे व्यक्ति की खंड (4) के उपखंड (क) और उपखंड (ख) के अधीन
संसद द्वारा बनाई गई विधि के उपबंधों के अनुसार निरुद्ध नहीं किया
जाता है।