नया अनुच्छेद 15-क - Page 360

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शब्दों के असमावेश से वे खो चुके हैं। श्रीमन, मैं इस अनुच्छेद को सदन के सम्मुख प्रस्तुत करता हूँ।

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* पंडित ठाकुर दास भार्गव : सदन ने अभी मुख्य प्रस्ताव पेशकर्ता के खंड (1) को सुना। मैं गर्म वाद-विवाद की याद सदन को कराना आवश्यक नहीं समझता जो करीब सवा साल पूर्व ’विधि की सम्यक प्रक्रिया’ शब्दों के इर्द-गिर्द गरमायी थी। अब ’सम्यक प्रक्रिया’ का सारवान भाग सत्तर प्रतिशत के पश्चात व्यावहारिक तौर पर अनुच्छेद 13में रक्षित होने के कारण छोड़ा जा चुका है। मुझे सोचना चाहिए कि अपने देश की परिस्थितियों में ’सम्यक प्रक्रिया’ का यह उपबंध शत -प्रतिशत आवश्यक है। इस देश में यही सही प्रक्रिया है। .........

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, क्या मैं एक शब्द कह सकता हूँ? अपने आदरणीय मित्र के एक संशोधन को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं जिसमें कहा गया है कि अभियुक्त को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार होगा। अनुच्छेद 15-क के

खंड (1) की अंतिम पंक्ति में यह शब्द जुड़ सकता है। यह इस प्रकार होगा ’अपनी पसंद के वकीलों से सलाह लेने के अथवा प्रतिरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं होना चिहए।’ मैं समझता हूँ कि यह मेरे मित्र के इरादे को कार्यरूप दे देगा।

पंडित ठाकुरदास भार्गव : विचरणों में दाण्डिक कार्यवाहियों में?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ’प्रतिरक्षा’ का वही अर्थ है। क्या हम अब यह बहस बंद नहीं कर सकते?

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** श्री एच. वी. कामथ : पुलिस अथवा अन्य अधिकारियों द्वारा व्यक्तियों की अनुचित गिरफ्तार करने से उत्पन्न बुराइयों या हानि को दूर करने या कम से कम हल्का करने की खातिर मैं इस संशोधन के द्वारा स्पष्ट व्यवस्था करना चाहता हूँ। गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के सात दिन के भीतर गिरफ्तारी के आधार बता दिए जाएंगे। डॉ. अम्बेडकर द्वारा पेश किए गए अनुच्छेद के शब्द हैं ’जितनी शीघ्र हो सके’। मुझे प्रसन्नता होगी कि व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार गिरफ्तारी के समय बता दिए जाएँ।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 14 सितम्बर, 1949, पृ. 1501

** वही पृ. 1515-16