नया अनुच्छेद 15-क - Page 361

340 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यही इरादा है। आप अपने संशोधन के द्वारा स्थिति खराब कर रहे हैं।

श्री एच.वी. कामथ : तब इसे असामान्य क्यों नहीं बनाते? ’जितना शीघ्र हो सके’ शब्दों के स्थान पर ’तुरंत’ शब्दों का मैं स्वागत करूँगा। उसी अनुच्छेद का एक संशोधन मेरी मित्र श्रीमती पूर्णिमा बनर्जी ने भी पेश किया है जहाँ वह ’जितना शीघ्र हो सके’ शब्दों के स्थान पर ’पंद्रह दिन से कम नहीं’ शब्द रखने की इच्छा करती हैं। मैं समझता हूँ पंद्रह दिन का समय बहुत लंबा है। मैं समझता हूँ 24 घंटे बहुत अच्छा रहेगा। किसी भी दशा में यदि बंदी किए व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार बताने में कोई रुकावट है, मैं समझता हूँ कि किसी भी दशा में वह एक सप्ताह से अधिक नहीं होनी चाहिए।

श्रीमन, दूसरे संशोधन संख्या 108 पर आकर मैं पेश करने की आज्ञा चाहता हूँ।

“कि सूची। के संशोधन संख्या 1 (आठवां सप्ताह) प्रस्तावित अनुच्छेद 15-क के उप वाक्य खंड (2) में अंत में आने वाले शब्द ’न्यायाधीश, जो ऐसे व्यक्ति को सुनने का एक अवसर देगा’ शब्दों को जोड़ दें।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे अपने मित्र श्री कामथ को बता देना चिहए

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कि वह स्थिति को बहुत खराब कर रहे हैं। हमारा इरादा है कि ’जितना शीघ्र संभव हो’ शब्दों का वास्तविक अर्थ यदि बंदीकरण से पहले नहीं तो गिरफ्तारी के तुरंत बाद है। खंड (2) कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति जो गिरफ्तार हुआ है और हवालात में रोका गया है ऐसी गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर पास के मजिस्ट्रेट के सम्मुख पेश किया जाएगा। कोई भी न्यायाधीश हवालात में लंबे समय तक रोकने की आज्ञा दने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकता जब तक उसे यह पता न चल जाए कि किन आरोपों पर उस व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है।

श्री एच.वी. कामथ : मैं दण्ड प्रक्रिया को थोड़ा जानता हूँ। मुझे उन मामलों की जानकारी है जहाँ मजिस्ट्रेट ने बिना पुलिस के चालान अथवा आरोप-पत्र उसके सामने पेश व्यक्तियों को चौदह दिन के लिए रिमांड पर भेज दिया है। मैं ऐसे मजिस्ट्रेट को भी जानता हूँ जिन्होंने मामले को प्रथम दृष्ट्या जानने की चिंता किए बिना व्यक्तियों को रिमांड पर भेज दिया है। दूसरी बात जो डॉ. अम्बेडकर ने कही यह थी कि ’जितनी शीघ्रता हो सके’ का वास्तविक अर्थ ’तुरंत’ है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसका अर्थ है हर दशा में चौबीस घंटे।

श्री एच.वी. कामथ : क्या मैं उनका ध्यान कुछ अनुच्छेदों की ओर आकर्षित करूँ जहाँ शब्द ’यथाशीघ्र’ बिना विशिष्ट आवश्यकता के प्रयोग हुआ है। उदाहरण के लिए अनुच्छेद 280 लीजिए जिसका संबंध राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों से है।