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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ’यथाशीघ्र’ शब्द का अर्थ अवश्य संदर्भ के साथ भिन्न होगा।
श्री एच. वी. कामथ : मैं नहीं जानता कि डॉ. अम्बेडकर इस संविधान में प्रयोग किए गए शब्दों और पदों के अर्थ के निर्वाचित के बारे में वकीलों और न्यायाधीशों की शंका की बहस करने के लिए सदैव भारत में रहेंगे। मुझे अफसोस है कि हमारे न्यायाधीशों और वकीलों को इस देश में मार्गदर्शन करने के लिए डॉ. अम्बेडकर सदैव अमर नहीं रहेंगे। चूंकि संविधान डॉ. अम्बेडकर के जीवनकाल के लिए नहीं बनाया जा रहा है बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए है। मैं समझता हूँ कि जो कुछ हम कहते हैं वह स्पष्ट होना चाहिए।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप अपने अमरत्व को बहुत सस्ता बेच रहे हैं।
श्री एच.वी. कामथ : भौतिक अमरत्व की मेरी कोई इच्छा नहीं है। ऐसा मालुम होता है कि डॉ. अम्बेडकर मान बैठे हैं कि वह अमर रहेंगे।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आपको स्वीकार कर लेना चाहिए कि आपने इस संशोधन को पटल पर रख कर गलती की है।
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* श्री एच.वी. कामथ : डॉ. अम्बेडकर ने अपने भाषण में पूर्ण स्वतंत्रता के उत्साही वीर का संदर्भ दिया। मैं इसे बिल्कुल स्पष्ट करूंगा कि मैं पूर्ण स्वतंत्रता का पक्षपाती नहीं हूँ।
माननीय सभापति : आज वह पूर्ण स्वतंत्रता की बात नहीं करते।
श्री एच.वी. कामथ : श्रीमन, उन्होंने की थी यदि मुझे ठीक याद है। (डॉ. अम्बेडकर ने स्वीकार किया।) उन्होंने व्यक्तिगत पूर्ण व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लेख किया। मैं पूर्ण व्यक्तिगत स्वतंत्रता का समर्थक या अधिवक्ता नहीं हूँ।
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अनुच्छेद 15-क
श्री महावीर त्यागी (संयुक्त राज्य : सामान्य) : श्रीमन, डॉ. अम्बेडकर मुझे माफ
करेंगे जब मैं अपनी खुशी की इच्छा प्रकट करता हूँ कि वह और प्रारूपण समिति के अन्य सदस्य समिति के सदस्य होने से पूर्व जेल में रहने का अनुभव रखते थे।
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 14 सितम्बर, 1949, पृ. 1518
** ख्., वही, पृ. 1547