342 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसके पश्चात् वह अनुभव प्राप्त करने की मैं कोशिश करूँगा।
श्री महावीर त्यागी : मुझे डॉ. अम्बेडकर को विश्वास दिलाना चाहिए कि यद्यपि अंगरेजी सरकार ने उनको यह विशेषाधिकार नहीं दिया है, संविधान जिसे वह अपने हाथों से बना रहे हैं उनके जीवनकाल में यह विशेष अधिकार देगा। एक दिन आएगा जब वह उन्हीं उपबंधों के उन्हीं खंडों के अधीन विरुद्ध जाएंगे। .....गड़बड़ी।
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* श्रीमती जी. दुर्गाबाई : श्रीमन, इस अनुच्छेद को मैं सदन की स्वीकृति के लिए रखती हूँ।
माननीय सभापति : मैं समझता हूँ कि आलोचना का उत्तर देने के लिए डॉ. अम्बेडकर कुछ सुझाव देंगे जो हमने इस अनुच्छेद के विरुद्ध किए हैं। इसलिए मैं उनको एक अवसर इस स्तर पर बोलने का दूँगा यदि और भी प्रश्न पैदा होंगे तो हम उन पर विचार करेंगे।
बाबू रामनरायण सिंह (बिहार : सामान्य) : क्या वह अनुच्छेद को पूरी तरह से
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हटाने के लिए सहमत हैं? माननीय सभापति : नहीं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मैंने वास्तव में नहीं सोचा था कि अनुच्छेद 15-क की बहस में इतना अधिक समय लग जाएगा। जैसा मैंने कहा स्वयं मैं, प्रारूपण समिति के बड़ी संख्या में सदस्य और जनता के सदस्य महसूस करते हैं कि अनुच्छेद 15 की भाषा के बारे में अर्थात् यह कि विधि द्वारा बनाई गई पद्धति के अनुसार गिरफ्तारी होनी चाहिए हमने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा और सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया है। सदैव से इस संविधान को स्वीकार किया गया मैं और मेरे मित्र किसी प्रकार सम्यक प्रक्रिया शब्दों का प्रयोग किए बिना मौलिक रूप सम्यक तरीके के संतोष के लिए प्रयत्न कर रहे थे। मैंने सोच लिया होता कि सदस्य जो व्यक्ति विशेष की स्वतंत्रता में रूचि लेते हैं, अपने सामने अनुच्छेद 15-क के उपबंध देखकर संतोष से कहीं अधिक प्राप्त कर रहे होंगे। भगवान की कृपा समझकर उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया होगा।
लेकिन मुझे दुःख है कि जिन लोगों ने इस बहस में भाग लिया उनमें यह भावना नहीं थी और उन्होंने अपने को केवल आलोचक की स्थिति में ही नहीं रखा
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 14 सितम्बर, 1949 पृ. 1556-1565