अनुच्छेद 15-क - Page 364

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है अपितु वे इस अनुच्छेद के प्रतिवादी बन गए। वास्तव में, उनका स्वतंत्रता के प्रति प्यार इतना बढ़ गया कि उन्होंने मुझसे भी कहा कि इस अनुच्छेद को वापिस लेना ही अधिक अच्छा होगा।

श्रीमन, अब मैं उस सलाह को मानने के लिए तैयार नहीं हूँ क्योंकि मेरे मन में तनिक भी शंका नहीं है कि यह बुद्धिमत्तापूर्ण मार्ग नहीं है और इसलिए मैं अनुच्छेद 15-क पर दृढ़ रहूँगा।

मैं अच्छी तरह समझता हूँ कि यहाँ कुछ मुद्दे हैं जो विभिन्न आलोचकों ने बनाए हैं जो सहानुभूतिपूर्ण विचार चाहते हैं और मुद्दों पर जो उठाए गए हैं ऐसा विचार करने के लिए मैं तैयार हूँ और सदन को कुछ संशोधन सुझाऊँगा जो मैं समझता हूँ की गई आलोचना को दूर कर देंगे कि मसौदा अनुच्छेद 15-क से कुछ मूलभूत मुद्दे छोड़ दिए गए हैं। आलोचना का उत्तर देते हुए मैं अनुच्छेद के साधारण भाग को विशेष भाग से अलग करता हूँ जो निवारक निरोध के बारे में हैं। मैं निवारक निरोध को अलग से लूँगा।

अब अनुच्छेद 15-क के खंड (1) पर लौट रहा हूँ। मैं समझता हूँ तीन सुझाव दिए गए थे एक ’यथाशक्य शीघ्र’ शब्द से संबंधित है। इसके सदस्यों द्वारा सुझाए संशोधन है कि इन शब्दों को छोड़ दिया जाए और इनके स्थान पर ’पंद्रह दिन’ शब्द और कुछ स्थानों पर ’सात दिन’ शब्दों की सलाह दी गई है। मेरे अनुसार यह संशोधन जो ’यथाशक्य शीघ्र’ का अर्थ है इससे पूर्ण गलतफहमी दिखाते हैं जिस संदर्भ में इसका प्रयोग हुआ है। आंतरिक तौर पर यह शब्द खंड (2) से जुड़े हुए हैं और मेरे विचार से यह जिस संदर्भ में खंड (2) के उपबंध में प्रयुक्त हुए हैं उससे अन्यथा नहीं पढ़े जा सकते। निश्चित रूप से है कि कोई व्यक्ति जो गिरफ्तार किया गया है 24 घंटे से अधिक हवालात में नहीं निरुद्ध किया जा सकता जब तक 24 घंटे के पश्चात् पुलिस अधिकारी जो गिरफ्तार करता है और निरुद्ध करता है, मजिस्ट्रेट से अधिकार प्राप्त नहीं कर लेता। इस अनुच्छेद को इसी प्रकार पढ़ना होगा। अब यह स्पष्ट है कि यदि पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट गिरफ्तारी को 24 घंटे के पश्चात् जारी रखने के लिए न्यायिक अधिकार चाहता है तो यह स्वतः सिद्ध है कि वह मजिस्ट्रेट को कम से कम वे आरोप बताए जाए जिनके अधीन व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। जिसका अर्थ है कि ’यथाशीघ्र’ को 24 घंटे से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। इसलिए वे सभी संशोधन जो 15 दिन अथवा 7 दिन संशोधन हैं जो वास्तव में व्यक्ति की स्वतंत्रता को काटते हैं इसलिए मैं सोचता हूँ वे संशोधन पूरी तरह से गलत स्थान पर रखे हैं और वे वांछित नहीं हैं।

दूसरा उठाया गया मुद्दा है कि जब हमने अनुच्छेद 15क के खंड (1) में अभियुक्त