अनुच्छेद 15-क - Page 365

344 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को अपनी इच्छा के वकील की सलाह लेने का अधिकार दिया है तो अपना बचाव वकील के द्वारा करने की आज्ञा देने का कोई उपबंध हमने नहीं किया है। दूसरे शब्दों में, सलाह लेने का अधिकार और बचाव कराने का अधिकार में हमने अंतर किया है। व्यक्तिगत तौर पर मैंने सोचा कि ’परामर्श लेना’ शब्द में बचाव करने का अधिकार भी सम्मिलित है क्योंकि परामर्श लेना पूरी तौर पर उद्देश्य रहित हो जाएगा यदि यह बचाव के उद्देश्य के लिए नहीं है। तथापि, किसी संदिग्धार्थता अथवा किसी तर्क को दूर करने के लिए कि परामर्श लेना सीमित अर्थ में प्रयोग होता है। ’परामर्श’ शब्दों के पश्चात् मैं ’एक वकील (विधि व्यवसायी) के द्वारा बाचाया जाना हो’ शब्द जोड़ने के लिए तैयार हूँ जिससे दोनों ’परामर्श लेने’ और बचाव करने का अधिकार हो। अंतिम वक्ता द्वारा ’अपनी पसंद का विधि व्यवसायी’ शब्दों के अर्थ के बारे में एक प्रश्न खड़ा किया गया है। निःसंदेह ’अपनी पसंद का’ शब्द महत्वपूर्ण है और वे विचार-विमर्श के बाद प्रयोग किए गए हैं क्योंकि हम नहीं चाहते कि आज की सरकार अभियुक्त पर उसके मुकदमे की पैरवी करने के लिए चोरी से वकील थोपे जिसे वह ठीक समझती है क्योंकि अभियुक्त का उसमें विश्वास नहीं होगा। ’विधि व्यवसायी’ पद के द्वारा अर्थ वही है जिसे हम साधारण तौर पर समझते हैं अर्थात् एक व्यवसायी जो उच्च न्यायालय के अथवा संबंधित अदालत के नियमों द्वारा व्यवसाय (वकालत) करने के लिए हकदार है।

श्रीमन, अब मैं खंड (2) पर आता हूँ। मुख्य बिन्दु मेरे मित्र पाटसकर द्वारा उठाया गया है। जहाँ तक मैं इसे समझ सका वह ’मजिस्ट्रेट’ शब्द को ’प्रथम मजिस्ट्रेट’ शब्द से बदलना चाहते थे। अच्छा, उनके द्वारा सुझाए गए शब्दों को स्वीकार करने में मुझे दो कारणों से कठिनाई है। हमने खंड (2) में बहुत महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग किया है जैसे ’निकटतम मजिस्ट्रेट’ और मैंने सोचा कि वह अति आवश्यक था क्योंकि अन्यथा यह पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार व्यक्ति को इस आधार पर लंबे समय तक बंदी बनाने में समर्थ बना देता कि वह विशेष मजिस्ट्रेट जिसके पास अभियुक्त को ले जाना था अथवा आखिकरकार जिस मजिस्ट्रेट के वहाँ अभियुक्त का विचारण करने के लिए हकदार होगा, काफी दूर रह रहा है और इस प्रकार अभियुक्त को अधिक समय तक निरूद्ध रखने का उसके पास उचित आधार होगा। इस प्रकार, ऐसे तर्क को दूर रखने के लिए हमने ’निकटतम मजिस्ट्रेट’ शब्द प्रयोग किया था। अब, मान लीजिए हम ’निकटतम वर्ग I मजिस्ट्रेट’ शब्दों का प्रयोग करना चाहते थे; स्थिति बहुत जटिल हो जाएगी। यहाँ ’निकटतम मजिस्ट्रेट’ होना चाहिए जिसके पास पुलिस अधिकारी अभियुक्त के अपने हित में कि उसके मामले पर न्यायिक तौर पर विचार किया जा सके। लेकिन हो सकता है कि वह प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट न हो। इसलिए हमें वास्तव में एक विकल्प लेना है क्या हम अभियुक्त को मामले का विनिश्चय होने