346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक मजिस्ट्रेट मानो एक के पश्चात् दूसरा लगातार रिमांड स्वीकार करता जाता है, इस प्रकार पुलिस को अभियुक्त को अभिरक्षा में रखने में समर्थ बनाता है। यह ऐसा मामला है जिसका अभियुक्त के पास कोई इलाज नहीं है। मैं समझता हूँ अभियुक्त के पास इसका इलाज उच्च न्यायालय में पुनरीक्षण के लिए जाना है और यह कहना है कि न्यायालय की प्रक्रिया का दुरूपयोग किया जा रहा है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : गरीब व्यक्ति किस प्रकार उच्च न्यायालय जा सकता है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस पर मैं अपना दिमाग बंद करना नहीं
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चाहता। यदि यहाँ आवश्यक है तो मैं सोचता हूँ कि प्रारूपण समिति को इस पर बाद में विचार करने के लिए छोड़ दिया जाए कि क्या इन शब्दों का समावेश आवश्यक है। जैसा कि इस समय सलाह दी गई थी हम समझते हैं ये शब्द आवश्यक नहीं हैं।
अब मैं निवारक निरोध से संबंधित अनुच्छेद 15(3) के भाग दो पर आता हूँ। अनुच्छेद के इस भाग के विरुद्ध मेरे मि. श्री त्यागी पूरी तरह नाराज हैं। अच्छा मैं सोचता हूँ अपने मित्र श्री त्यागी को इस आधार पर माफ कर दूंगा क्योंकि आखिरकार वह वकील नहीं हैं और वह वास्तव में यह भी नहीं जानते कि क्या हो रहा है। उनकी अचानक नींद खुल गई है जब कुछ चीज जो साधारण दिमाग के समझने योग्य है बिना सोचे ऊपर आए कि जो ऊपर उठा है और जो उन्हें जागृत करता है वास्तव में केवल अनुवर्ती है। लेकिन मैं सदन की सतह के सदस्यों को उनके द्वारा किए गए व्यवहार के लिए माफ नहीं कर सकता।
हम जो कर रहे हैं वह क्या है? हम जो अब कर रहे हैं उसे मुझे सदन के सामने स्पष्ट करने दो। सातवीं अनुसूची में हमारे सामने तीन सूची थीं। तीनों सूचियों में निवारक निरोध से संबंधित दो प्रविष्टियाँ सम्मिलित थी, एक पहली सूची I में और दूसरी सूची III में I अब यह मानकर, निवारक निरोध से संबंधित अनुच्छेद का यह भाग छोड़ दिया था। इसका क्या प्रभाव होगा? इसका प्रभाव होगा कि प्रांतीय विधानमंडल तथा केंद्रीय मंत्रिमण्डल को निवारक निरोध पर किसी प्रकार की विधि बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी क्योंकि यदि यह संविधान विशेष अनुच्छेद के द्वारा किसी प्रकार के कानून बनाने के बारे में जो हमने अभी दोनों केंद्र और प्रांत को दिए हैं, रोक नहीं लगाते तो यहाँ कोई स्वतंत्रता नहीं बचेगी और संसद और प्रांतीय विधानमंडल को निवारक निरोध पर किसी प्रकार का कानून बनाने की पूर्ण स्वतंत्रता होगी। क्या सदन के वकील सदस्य इस प्रकार की स्वतंत्रता राज्य विधानमंडल और संसद को देना चाहेंगे? मेरा निवेदन है कि उनका व्यवहार जैसा आज प्रदर्शित हुआ था कि हमको कोई ऐसा उपबंध नहीं चाहिए, तब उन्हें क्या और करना चाहिए था