अनुच्छेद 15-क - Page 368

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कि सूची I और सूची III की प्रविष्टियों पर एतराज करते। हम चीजों को छोड़ने का प्रयत्न कर रहे हैं। हमने राज्य विधानमंडल और संसद को निवारक निरोध के बारे में कानून बनाने की शक्तियाँ दी हैं। मैं जो यत्न कर रहा हूँ, वह उन शक्तियों को कम करना है और उन पर पाबंदी लगाना है। मैं बदतर नहीं कर रहा हूँ आप ने बदतर किया है।

दूसरे भाग में रखे गए विशेष उपबंध पर आने तक, मैं पहले ......(गड़बड़ी)

पंडित ठाकुरदास भार्गव : उन सूचियों को किसने बनाया?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैंने बनाया। आपने उनको पारित किया।

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यह परमितता मेरे दिमाग में थी। अब मैं खंड 3(ख) के परंतुक पर आता हूँ।

श्री महावीर त्यागी : क्या आप एक साधारण व्यक्ति को यह समझाने में सहायता करेंगे कि मामलों के सलाहकार बोर्ड ने खंड (4) के अधीन आप को पुनरावृत्ति क्यों नहीं करने दी?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इस सदन में मैं उनको कानूनी बिंदु स्पष्ट

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नहीं कर सकता। यह सदन कानून की कक्षा नहीं है और मैं अब इस प्रकार के स्पष्टीकरण में नहीं फंस सकता। आदरणीय सदस्य मेरे मित्र हैं यदि वह नहीं समझते वह आ सकते हैं और बाद में पूछ सकते हैं।

अब मैं परंतुक की बात करूंगा जो दो प्रकार की आलोचना का शिकार है। एक आलोचना यह है कि उन आदमियों के बारे में जो गिरफ्तार हुए हैं और हवालात साधारण परंतुक के अधीन हैं जो परंतुक निवारक निरोध से भिन्न हैं, हमने अनुच्छेद 15-क के खंड (1) में उपबंध बना दिया है कि अभियुक्त को उसकी गिरफ्तारी के आधार बता दिए जाएंगे। मैंने कहा हम ऐसा कोई उपबंध उन व्यक्तियों के मामले में नहीं बनाते जो निवारक निरोध में रोका गया है। मैं समझता हूँ यह उचित आलोचना है। मैं स्थिति को सुधारने के लिए तैयार हूँ क्योंकि मैंने देखा कि प्रांतीय सरकारों द्वारा निवारक निरोध के मामले में बनाए गए। मौजूद नियमों के अधीन भी, उन्होंने उपबंध अपराधी को उसकी गिरफ्तारी की सूचना देने के लिए बनाए हैं जिनके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है। व्यक्तिगत तौर पर मैं कोई कारण नहीं देखता कि जब जो प्रांत निवारक निरोध कानून रखते हैं, यह उपबंध क्यों रखते हैं यह संविधान के बीच में नहीं आएंगे। इसलिए मैं निम्नलिखित खंड को रखने को तैयार हूँ अनुच्छेद 15-क के उपवाक्य खंड (3) के पश्चात् :

“(3-क) इस अनुच्छेद के खंड (3) के वाक्य (ख) के अधीन जब किसी व्यक्ति के बारे में एक आदेश दिया जाता है...“