348 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बाबू रामनारायण सिंह : श्रीमन, डॉ. अम्बेडकर कहते हैं कि प्रदेश इस खंड को सम्मिलित करना चाहते हैं।
माननीय सभापति : इस प्रकार की कोई बात उन्हाँने नहीं की। उन्होंने जो कुछ कहा है वह यह है कि बहुत से अधिनियम जो राज्यों द्वारा निवारक निरोध पर पारित किए गए हैं, उनके पास बहुत से उपबंध हैं। वह इस अनुच्छेद में ऐसा ही परंतुक समाविष्ट कराना चाहते हैं।
बाबू रामनारायण सिंह : मैं जानना चाहता था क्या हम प्रांतों के कहने पर कानून पारित कर रहे हैं?
माननीय सभापति : इस प्रकार की कोई बात नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं देखता हूँ कि श्री रामनारायण सिंह कुछ हद तक जिस राज्य में रहते हैं उस प्रांत की सरकार से असंतुष्ट हैं।
जैसा मैं कह रहा था, मैं सोचता हूँ यह उपबंध करना चाहिए -
अनुच्छेद 15क के खंड (3) के उपखंड (ख) के अधीन किसी व्यक्ति के बारे में जब एक आदेश किया जाता है आदेश करने वाला अधिकारी जैसे ही उसे सूचना मिलेगी तुरंत गिरफ्तारी के आधार जिन पर आदेश दिया गया है उनको बताएगा तथा उस आदेश के विम्द्ध अभ्यावेदन करने के लिए उसे शीघ्रातिशीघ्र अवसर देगा।
(ख) “इस अनुच्छेद के खंड (3क) की किसी बात से आदेश देने वाले प्राधिकारी के लिए ऐसे तथ्य को प्रकट करना आवश्यक होगा जिसे ऐसा अधिकारी लोकहित के विरुद्ध समझता है।“
प्रांतों के अधिनियमों में ठीक-ठीक शब्द हैं मुझे कोई कारण दिखाई नहीं देता कि इन्हें यहाँ क्यों न रखा जाए जिससे कि इस आधार की आलोचना कि हम एक व्यक्ति को बिना उसकी गिरफ्तारी के कारण उसे बताएं। इसलिए रोक रहे हैं कि उसका मामला निवारक निरोध अधिनियम में आता है।
अब मैंने जो संशोधन प्रस्तावित किया है, उससे ठीक हो जाता है।
दूसरा प्रश्न है .......गड़बड़ी
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अतिरिक्त है? यहाँ पहले से ही एक उपबंध है कि कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए हवालात में नहीं रखा जाएगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : निवारक निरोध में गिरफ्तार लोगों के विषय में यह व्यवहार नहीं करता।