350 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
प्रभावी बनाना चाहते हैं, स्थिति क्या होगी? क्या कार्यपालिका के लिए मामले तैयार करना संभव होगा, कहो उन एक सौ व्यक्तियों के विरुद्ध जो हवालात में रोक रखे गए हों, संक्षेप तैयार करना, पूरी सूचनाएं इकट्ठी करना और सलाहकार बोर्ड को मामला भेजना? क्या यह व्यवहारिक संभावना है? क्या सलाहकार बोर्ड के लिए इतने मामले तीन माह में समाप्त करना व्यवहारिक तौर पर संभव होगा, क्योंकि मैं कहूँगा कि इस नियम के उपवाक्य खंड (क) में रखे गए उपबंध उसमें निर्णित है यदि वह व्यक्ति को तीन माह से अधिक रोकना चाहें तो उन्हें इस संबंध में सलाहकार बोर्ड से आदेश अवश्य लेना चाहिए।
इसलिए इस मामले में प्रशासनिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए प्रारूपण समिति ने महसूस किया कि स्थिति की आवश्यकताएं तीन माह की समय-सीमा रखकर पूरी होनी चाहिए। यह विशेष समय-सीमा निश्चित करने में प्रारूपण समिति का कोई अन्य इरादा नहीं है और मैं आशा करता हूँ कि जिन शब्दों के बारे में मैंने सदन के सामने उल्लेख किया है सदन सहमत होगा कि यह अच्छा और उचित उपबंध है जो बनाया जा सका।
अब मैं सलाहकार बोर्ड पर आता हूँ। दो मुद्दे उठाए गए हैं। एक यह कि सलाहकार बोर्ड की पद्धति क्या है? उपखंड (क) पद्धति का कोई विशेष संदर्भ सलाहकार बोर्ड द्वारा मानने के लिए बाध्य नहीं करता। निर्दिष्ट प्रश्न में पूछा गया है क्या उपखंड (क) में संबंधित मामले के सभी कागज सलाहकार बोर्ड के सामने रखना कार्यपालिका के लिए आवश्यक होगा जो उन्हें किसी व्यक्ति को निवारक निरोध में रोकने के लिए जरूरी होंगे।
संकेत किए गए प्रश्न में पूछा गया है क्या अभियुक्त को बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने, गवाह की प्रतिपरीक्षा और अपना स्पष्टीकरण देने का अधिकार है। यह बिल्कुल सच है कि जांच में पद्धति अपनाने के मामले में उपखंड (क) मौन है जिसे सलाहकार बोर्ड द्वारा किया जाना है। यह मानते हुए कि उपखंड (क) सुधरा नहीं है जैसा था वैसा ही है। क्या परिणाम होंगे? जैसा मैंने इसे पढ़ा, आदेश के समर्थन में रिपोर्ट प्राप्त कर लेना आवश्यक उपबंध है। कार्यपालिका के नाम पर यह गलत होगा कि वह किसी व्यक्ति को जिस दिन अपने अधिकार में तीन माह पूरे होते हैं सलाहकार बोर्ड की सिफारिश के बिना निरुद्ध रखे। इसलिए यदि कार्यपालिका सरकार सलाहकार बोर्ड के सामने कुछ कागज जिन पर आधारित है नहीं रखती है तो वे किसी व्यक्ति को तीन माह से अधिक हवालात में रखने का अधिकार खो देगी।
इसलिए उसके अपने हित में कार्यपालक सरकार के लिए वांछनीय और मेरे विचार में आवश्यक होगा कि वह सलाहकार बोर्ड के सामने वह कागजात रखे जिन पर वह विश्वास करती है। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो निवारक विधि के प्रशासन