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के मामले में बहुत बड़ा खतरा ले रहे होंगे। मेरे निर्णय में यह अपने आप में काफी संरक्षा होगी कि कार्यपालिका उसके सामने रखेगी।
यदि मेरे मित्र इससे संतुष्ट नहीं हैं तो मेरे पास दूसरा प्रस्ताव है और वह यह है कि खंड (क) के तरीके में कोई विशेष उपबंध किए बिना उपखंड (4) के पश्चात् निम्नलिखित शब्द जोड़ें : “इस अनुच्छेद के खंड (3) के परंतुक के खंड (क) के अधीन सलाहकार बोर्ड जांच करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया संसद भी विहित कर सकती है।“ मैं सलाहकार बोर्ड द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में उपबंध करने की संसद को शक्ति देने के लिए तैयार हूँ। मैं समझता हूँ स्थिति की आवश्यकता उससे पूरी हो जानी चाहिए।
श्रीमन, अनुच्छेद 15-क के विभिन्न भागों की आलोचनाओं के उत्तर में मैं यही संशोधन स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
अब मैं कुछ विविध सुझावों पर वाद-विवाद करने के लिए आगे बढूंगा।
श्री जसपतराय कपूर : उस दशा में कदाचित खंड (2) के परंतुक की उपधारा (ख) जाएगी?
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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : कुछ नहीं जाएगा।
गिरफ्तार हुए व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधार भी दे दिए जायेंगे और उसका बयान लिया जाएगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : और उसे लिखित बयान देने के लिए एक अवसर भी दिया जाएगा।
डॉ. बक्शी टेक चन्द : क्या आप उस दूसरे मुद्दे पर जिस पर मैंने आपका ध्यान आकर्षित किया था सहमत होंगे अर्थात् मद्रास अधिनियम की भांति स्पष्टीकरण बोर्ड के सामने रखा जाएगा?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उसके सामने सभी कागज रखे जाएंगे। यह वही है जो मैंने बताए हैं।
डॉ. बक्शी टेक चन्द : सभी कागज उसके सम्मुख पेश नहीं किए जाने चाहिएं। मुझे कुछ अनुभव है। वे कहेंगे कि यह बहुत छोटा मामला है। निश्चित समय के भीतर आप उसे स्पष्टीकरण देने का एक अवसर देते हैं, आप इस उपबंध को रखने में शर्मिन्दगी क्यों भुगत रहे हैं? मद्रास अधिनियम की धारा 3 की उपधारा (1) के उपखंड (1) में एक उपबंध है कि स्पष्टीकरण बोर्ड के सामने रखा जाएगा।