352 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह मैं समझता हूँ, मेरे कथन से प्रकट होता है।
डॉ. बक्शी टेक चन्द : इसे स्पष्ट क्यों नहीं करते? यह बम्बई अधिनियम में अथवा संयुक्त प्रांत कानून में नहीं है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : जैसा मैंने कहा अभियुक्त द्वारा उपखंड (क) के अधीन सलाहकार बोर्ड को कागज देने के संबंध में स्पष्टीकरण देना विवक्षित है। यदि ऐसा नहीं है तो मैं और उपबंध बना रहा हूँ कि संसद को विधि द्वारा प्रक्रिया बनानी चाहिए जिसमें संसद को स्पष्ट कहना चाहिए कि ये (अमुक) कागज सलाहकार बोर्ड के सामने रखे जाएंगे। अब मैं इससे अधिक रियायत बिल्कुल भी देने के लिए तैयार नहीं हूँ।
श्री महावीर त्यागी : डॉ. अम्बेडकर कृपया क्या मुझे एक मिनट का समय दीजिएगा?
श्री महावीर त्यागी : मैं जानना चाहता हूँ कि खंड (4) के अधीन गिरफ्तार व्यक्ति क्या संसद या प्रांतों द्वारा बनाई विधि के अनुसार अधिकरण द्वारा अपने मामले पर पुनर्विचार कराने की असुविधा प्राप्त है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरे मित्र श्री त्यागी इस प्रकार अभिनय कर रहे हैं जैसे यद्यपि वह डर में डूबे हुए हैं कि उनको स्वयं बंदी बनाया जा रहा है। मैं इसकी कोई आशा नहीं करता।
श्री महावीर त्यागी : मैं आपकी स्थिति की रक्षा की कोशिश कर रहा हूँ।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अब मैं अनेक प्रकार के कुछ विविध सुझावों पर विचार करूँगा।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : प्रतिपरीक्षा और प्रतिरक्षा के बारे में क्या है?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : प्रतिपरीक्षा का अधिकार दण्ड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अनिधियम में पहले से ही है। जब तक प्रांतीय सरकार पूरी तरह कठोरता से पागल नहीं हो जाती और इन उपबंधों को नहीं हटा लेती, इस प्रकार का कोई उपबंध बनाना अनावश्यक है। प्रतिरक्षा करने में प्रतिपरीक्षा सम्मिलित है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : वे इस हद तक शक्ति को हड़पने की कोशिश करते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यदि आप भारत का एक भी उदाहरण दे सकें जहाँ प्रतिपरीक्षा का अधिकार छीन लिया गया है, मैं इसे समझ सकता हूँ। मैंने ऐसा कोई मामला नहीं देखा है।