354 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैं और दूसरा एक यूरोपियन सदस्य इसके लिए लड़े और उसे प्राप्त किया। इसलिए स्वतंत्रता और आजादी महसूस करने के लिए जेल जाना आवश्यक नहीं है।
यहाँ एक और मुद्दा है जिसे मेरे मित्र श्री कामथ ने उठाया था। उन्होंने मुझसे पूछा था कि क्या उच्च न्यायालय के लिए बंदी की सुविधा के लिए आदेश निवारक निरोध में जारी करना आवश्यक है। स्पष्टतः स्थिति यही है। बंदी प्रत्यक्षीकरण का आदेश किसी मामले के लिए और किसी मामले में जारी किया जा सकता है लेकिन दूसरे आदेश भिन्न -भिन्न व्यक्ति के हालात पर निर्भर करते हैं, क्यांकि बंदी प्रत्यक्षीकरण का उद्देश्य बहुत सीमित है। यह अदालत द्वारा मालुम किए जाने के लिए सीमित है क्या वह कानून के द्वारा गिरफ्तार किया गया है अथवा उसे कार्यपालिका की इच्छा से गिरफ्तार किया गया है। उच्च न्यायालय का एक बार समाधान हो जाए कि व्यक्ति को किसी कानून के अधीन गिरफ्तार किया गया है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण समाप्त हो जाएगा। यदि उसे किसी कानून के अधीन गिरफ्तार नहीं किया गया था, तो स्पष्टतः प्रभावित पार्टी किसी अन्य आदेश की मांग कर सकता है जो गलतियों को सुधारने के लिए आवश्यक व उचित है। श्री कामथ के लिए यही मेरा उत्तर है।
श्रीमन, मैं आशा करता हूँ कि मेरे द्वारा सुझाए गए संशोधनों से सदन अनुच्छेद 15-क को स्वीकार करने की स्थिति में होगा।
माननीय सभापति : मैं अब संशोधन को मतदान के लिए रखूँगा। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वे सभी वापिस होने चाहिएं।
श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगाल) : नया खंड अभी जोड़ दिया गया है। क्या वे अब मत के लिए रखे जाएंगे?
माननीय सभापति : हाँ, अभी तुरंत।
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माननीय सभापति : प्रश्न है :
“कि प्रस्तावित नये अनुच्छेद 15-क के खंड (1) में उपर्युक्त संशोधन संख्या 1 में ’अपनी पसंद के विधि व्यवसायी’ शब्दों के ’और सभी आपराधिक कार्यवाहियों और मुकदमे की कार्यवाही में विधि व्यवसायी के द्वारा प्रतिरक्षा में’ शब्द रखे जाएँ।
(संशोधन अस्वीकार कर दिया गया।)
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* ख्., सीएडी खण्ड IX, दिनांक 14 सितम्बर, 1949 पृ. 1566