अधीनस्थ न्यायालय - Page 379

358 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 209-क, 209-ख और 209-ग के साधारण उपबंधों से जिस बात की अपेक्षा की जाती है, वह केवल मजिस्ट्रेसी के बारे में है जो अनुच्छेद 209-ड. के द्वारा लागू की जाती है। प्रारूपण समिति को बहुत प्रसन्नता होगी यदि यह संविधान लागू होते ही तुरंत वह उच्च न्यायालय द्वारा सिविल न्यायपालिका की नियुक्ति व नियंत्रण के बारे में उपबध सदन को सिफारिश करने की स्थिति में हो। लेकिन यह देखा गया है और यह समझ जाना चाहिए कि आखिरकार मजिस्ट्रेसी प्रशासन के सामान्य तरीके से संबंधित है। हम आशा करते हैं कि प्रस्ताव जो कुछ राज्यों द्वारा न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए प्रयुक्त किए जा रहे हैं, दूसरे प्रदेशों द्वारा भी स्वीकार किए जाएंगे जिससे अनुच्छेद 209-ड. के उपबंध मजिस्ट्रेटों के मामले में उसी प्रकार लागू किए जाएंगे जिस प्रकार सिविल न्यायपालिका में लागू करने का प्रस्ताव करते हैं। लेकिन न्यायपालिका अलग करने के प्रस्ताव इकट्ठे करने और उन्हें लागू करने के लिए कुछ समय अवश्य दिया जाना चाहिए। यह महसूस किया गया है कि किसी प्रांत के द्वारा न्यायपालिका को अलग करने और उन्हें लागू करने के उचित बदलाव होते हैं शीघ्रातिशीघ्र सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा राज्यपाल पर यह काम करना छोड़ देना सबसे अच्छा होगा। यह वह सब है जिसे मैं सोचता हूँ और बताना आवश्यक समझता हूँ। इसमें कुछ भी क्रांतिकारी नहीं है। 1935 का भारत शासन अधिनियम भी सिविल न्यायपालिका को नियुक्ति व नियंत्रण उच्च न्यायालय के अधीन करता था। हम मात्र उसी को मौजूदा मसौदे में बनाये रख रहे हैं।

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* श्री आर. के. सिधवा (मध्य प्रांत और बरार) : आप मुझे कृपया दुबारा पुकार

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सकते थे? जब मेरा नाम पुकारा गया था मैं कार्यालय के काम से बाहर था। लेकिन एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश करना चाहता था।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अनुपस्थिति क्षमा की प्रार्थना नहीं हो सकती।

माननीय सभापति : मुझे डर है अब बहुत देर हो गई है।

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** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : पिछले वक्ता के परीक्षणों के बारे में, मैं

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कहना चाहूँगा कि यह भाग प्रांतीय संविधान का भाग होगा और हम इस भाषा को

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 16 सितम्बर, 1949, पृ. 1575

** वही पृ. 1578-1579