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माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : राष्ट्रपति संसद का एक भाग है। कोई कठिनाई नहीं है।
माननीय सभापति : मैं अब श्री बष्जेश्वर प्रसाद के संशोधन को मतदान के लिए प्रस्तुत करूंगा।
ख् संशोधन अस्वीकार किया गया।
अनुच्छेद 215 स्ंविधान में जोड़ा गया।,
अनुच्छेद 303
* माननीय सभापति : अनुच्छेद 303 अब हम अनुच्छेद 303 की परिभाषा ले सकते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : सभापति महोदय, मेरा प्रस्ताव है कि :
“अनुच्छेद 303 के खंड (1) का उपखंड (ग) लुप्त कर दिया जाए।“
प्रस्ताव स्वीकार हुआ।
* * * *
** माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : (ख) के बारे में मैं एक मुद्दा बताना पसंद करूंगा। हम संविधान से दो भाग छोड़ने का प्रस्ताव कर रहे हैं जिनको हमने आरंभ में प्रस्तावित किया था जिनमें कुछ जातियाँ अनुसूचित जातियाँ और कुछ अनुसूचित जनजातियाँ गिनाई गई हैं। हमने सोचा कि वह संविधान में बहुत रुकावट डाल रही थीं और इसे राष्ट्रपति के आदेश द्वारा किए जाने के लिए छोड़ा जा सकता है। यही हमारा इस समय प्रस्ताव है। मुझे यह प्रतीत होता है कि इस स्थिति में, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियां की परिभाषा को संविधान के किसी अन्य भाग में स्थानांतरित करना और एक स्पष्ट अनुच्छेद उनके लिए बनाना आवश्यक होगा जिसमें कहा जाएगा कि राष्ट्रपति परिभाषा करेंगे कि कौन अनुसूचित जातियाँ और कौन अनुसूचित जनजातियाँ हैं। अब मुझे यह प्रतीत होता है कि अनुच्छेद 296 और 299 के बारे में प्रश्न उठाया गया है जिसे रोक लिया गया था। हो सकता है ’एंग्लो इंडियन’ और ’भारतीय ईसाइयों’ की परिभाषा जिसका उल्लेख (ख) व (ग) में है * ख्., सीएडी खण्ड IX, दिनांक 16 सितम्बर, 1949 पृ. 1583
** वही पृ. 1583-1584