अनुच्छेद 303 - Page 383

362 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उस प्रस्ताव के साथ दुबारा विचार किया जाए। मैं आपसे उन्हें इस समय रोकने के लिए अनुरोध करता हूँ।

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श्री वी. आई. मुनीस्वामी पिल्लई (मद्रास : सामान्य) : अनुसूचित जातियों से

संबंधित संपूर्ण मामले को रोक लिया जाए।

माननीय सभापति : मैं मानता हूँ कि सदन धारा (ख) व (ग) को रोकने के लिए सहमत है।

(उपखंड (ख) और (ग) रोके गए।)

माननीय सभापति : धारा (घ) का कोई संशोधन यहाँ नहीं है।

प्रश्न है :

“कि उपखंड (घ) को स्वीकार कर लिया जाए।“

प्रस्ताव स्वीकार हुआ। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : श्रीमन, मेरा प्रस्ताव है :

“कि अनुच्छेद 303 के खंड (1) की उपखंड (ड.) को लुप्त कर दें।

माननीय सभापति : अब कोई मुख्य न्यायाधीश नहीं है।

अधीनस्थ उच्च न्यायालय हैं जिन्हें मुख्य न्यायालय कहा जाता था और उनमें मुख्य न्यायाधीश होते थे।

संशोधन स्वीकार हुआ।

* * * *

अनुच्छेद 303 में से खंड (1) का उपखंड (ड.) लुप्त किया गया था।

(संशोधन संख्या 3219 पेश नहीं हुआ।)

माननीय सभापति : इसके बाद (च) इसका कोई संशोधन नहीं है।

प्रश्न है :

“कि खंड (1) का उपखंड (च) अनुच्छेद 303 का भाग है।“

प्रस्ताव स्वीकार हुआ। माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा प्रस्ताव है :

“कि अनुच्छेद 303 के खंड (1) के उपखंड (छ) के स्थान पर निम्नलिखित उपखंड रखा जाए :