22 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
होनी चाहिएं? यह एक प्रश्न है। दूसरा प्रश्न है कि प्रत्येक यात्रा में विधेयक को ऊपरी सदन जाने और वापस आने के लिए कितनी अवधि नियत की जानी चाहिए? तीसरा प्रश्न है कि वह अवधि जिसके अंतर्गत परिषद को कार्यवाही करनी है उसकी किस प्रकार गिनती की जाएगी। ऐसी शब्दावली में जिससे कि वे लोग परिचित हैं जो सीमा निर्धारण का नियम जानते हैं अवधि का आदि बिन्दु क्या होगा? जहाँ तक वर्तमान संशोधन से संबंध है यह प्रस्तावित किया जाता है कि विधेयक को दो यात्राएं करनी चाहिएं। यह शुरू में जाएगा, यह वापस आयेगा और फिर जायेगा। यह तर्क दिया जाना सम्भव हो सकता है कि दो से अधिक यात्राओं की अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। जैसा कि मैंने कहा यह व्यवहारिक राजनीति का प्रश्न है। हमें कोई अंत या निश्चित अंत खोजना है जब निचले सदन के प्राधिकार को सर्वोपरि हो जाने के लिए हमें अवश्य अनुमति दे देनी चाहिए और प्रारूपण समिति ने सोचा इस उद्देश्य के लिए ऊपरी सदन को संशोधन वाले सदन के रूप में कार्य करने के लिए दो यात्राएँ पर्याप्त हैं।
अब ऊपरी सदन को इन यात्राओं के दौरान विधेयक पर विचार करने के लिए जो अवधि अनुमत की जानी है, इस संबंध में प्रारूपण समिति का प्रस्ताव है कि दो महीने की अवधि अनुमत की जानी चाहिए। अब यह पहली स्थिति में तीन महीने भी हो सकती है जैसा कि मैंने अपने मित्र श्री टी.टी. कृष्णमाचारी द्वारा प्रस्तावित संशोधन को स्वीकार किया है। तथा दूसरी स्थिति में एक महीने की होगी।
मेरे मित्र पंडित कुंजरू ने कहा कि प्रारूपण समिति स्थिर चित्त नहीं थी, कि यह समय-समय पर बदलती रही थी, कि यह अस्थिर थी और उन्होंने प्रारूप संविधान में बनाये मूल प्रारूप का हवाला दिया जिसमें छः महीने की अवधि निर्धारित की गई है। यहाँ फिर मुझे यह बताना चाहिए कि दोनों सदनें को अनुमत अवधि सिद्धांत का मामला बिल्कुल भी नहीं है। यह एक व्यवहारिक राजनीति का ही मामला है और प्रारूपण समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि छह महीने का समय बहुत अधिक समय है। वास्तव में इसने महसूस किया कि तीन महीने का समय भी बहुत समय है। लेकिन इसकी बिल्कुल कल्पना की जा सकती है कि जमींदारी विधेयक के जैसा विधेयक जिसमें अधिक संख्या में धारायें हैं निचले सदन से निकल कर आ सकता है और उसे ऊपरी सदन के पास विचारार्थ भेजा जा सकता है। लेकिन इस प्रकार की अपवादीय स्थितियों के लिए मैं समझता हूँ मेरे दोस्त सहमत होंगे कि दूसरे उपाय उसी परिमाण में या सारयुक्त नहीं होंगे। परिणामस्वरूप, हमने सोचा कि जब विधेयक प्रथम यात्रा पर जाता है, की स्थिति में ऊपरी सदन को अनुमति दिये जाने के लिए तीन महीने का समय उचित समय है क्योंकि आखिरकार ऊपरी सदन को