अनुच्छेद 197 - Page 47

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुच्छेद 127-अ

* माननीय सभापति : मैं सोचता हूँ कि हम अनुच्देद 210 तथा 211 लें। उसके बाद हम अनुच्छेद 127-अ पर आयेंगे।

श्री टी.टी. कृष्णमाचारी : किसी भी तरह से यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि यदि यह स्वीकार कर लिया जाता है तब अनुच्छेद 210 तथा 211 स्वतः ही गिर जाते हैं। मननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँः लेखा परीक्षा प्रतिवेदन ’127-अ किसी राज्य के लेखा से संबंधित भारत के लेखा लेखा परीक्षा प्रतिवेदन

राज्य के लेखा के संबंध नियंता तथा महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदन राज्य के राज्यपाल राज्य के लेखा के संबंध

में। या शासक को सौंपे जायेंगे, जो उन्हें राज्य की विधानपालिका में।

के सामने रखने में कारण बनेगा।’“

सदन को याद होगा कि इसने ऐसे अनुच्छेदों को अपना लिया है जहाँ से लेखा परीक्षण तथा लेखा विधि एक ही संस्थान बन जायेंगे, कहने का अर्थ है, लेखा नियन्ता तथा महालेखा परीक्षक के प्राधिकार के तहत। इसलिए, यह आवश्यक है कि हमें कुछ व्यवस्था करनी चाहिए कि किसी राज्य के लेखा तथा लेखा परीक्षा से संबंधित प्रतिवेदन विधानपालिका को राज्यपाल या शासक द्वारा इसके विचारार्थ सौंप दिया जायेगा और इसी के बारे में यह अनुच्छेद व्यवस्था करता है।

माननीय सभापति : क्या कोई भी इस अनुच्छेद के विषय में कुछ कहना चाहता है? माननीय सदस्य : नहीं।

नया अनुच्छेद 127-अ संविधान में जोड़ दिया गया।

अनुच्छेद 197

** माननीय सभापति : क्या हम अनुच्छेद 212 लें?

श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : अनुच्छेद 188 लिया जा सकता है; इसे हटाया जाता है।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरा सुझाव था कि अनुच्छेद 188 और 278 साथ-साथ लिए जा सकते हैं। यह अच्छा होगा यदि पूरी बात की व्याख्या की जाती है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 1 अगस्त, 1949, पृ. 63

** वही, पृष्ठ 63