अनुच्छेद 212 से 214 तक - Page 48

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माननीय सभापति : तब, हम अनुच्छेद 197 लेंगे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ :

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“कि अनुच्छेद 197 के लिए, अधोलिखित अनुच्छेद को प्रतिस्थापित किया जायः- न्यायाधीशों के ’197 (1) प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को उतना वेतन न्यायाधीशों के

वेतन आदि। दिया जायेगा जितना कि द्वितीय अनुसूची में इसका उल्लेख है। वेतन आदि।

(2) प्रत्येक न्यायाधीश इस प्रकार के भत्ते और अनुपस्थिति की छुट्टी तथा पेंशन के संबंध में इस प्रकार के अधिकार जो समय-समय पर संसद द्वारा या संसद द्वारा बनाये गये कानून के द्वारा तय किए जा सकते हैं, और जब तक तय नहीं किए जाते तब तक इस प्रकार के भत्तों और अधिकारों जिनका द्वितीय अनुसूची में उल्लेख है, का अधिकारी होगाः

बशर्ते कि न्यायाधीश के न तो भत्ते और न ही अनुपस्थिति की छुट्टी या पेंशन के संबंध में उसके अधिकार उसकी नियुक्ति के बाद उसके अहित हेतु बदले जायेंगे।“

यह अनुच्छेद उस अनुच्छेद के समान है जिसका संबंध सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों से था।

माननीय सभापति : पंडित कुंजरू द्वारा एक संशोधन है।

[ सूची I (द्वितीय सप्ताह) के संशोधन 20, 21 तथा 22 प्रस्तावित नहीं किए गये। ]

माननीय सभापति : इसके लिए कोई संशोधन प्रस्तावित नहीं किया गया है। मैं इस अनुच्छेद को मतदान के लिए रखूंगा जैसा कि आज डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित किया गया है।

प्रस्ताव अपना लिया गया।

अनुच्छेद 197 जैसा कि संशोधित किया गया संविधान में जोड़ दिया गया।

* माननीय सभापति : क्या हम अनुच्छेद 212 लें?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं 212 से 214 तक के अनुच्छेदों

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को स्थगित किया जाना पसन्द करूंगा। मैं सोचता हूँ कि अनुच्छेद 275 लिया जा सकता है।

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 1 अगस्त 1949, पृ. 65