28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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अनुच्छेदों को स्थगित किए जाने की मांग की गयी है। मैं सोचता हूँ कि सदन इसका स्पष्टीकरण जानना चाहेगा कि वे क्यों स्थगित किए जा रहे हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : स्पष्टीकरण इस प्रकार है कि अधिवासियों के भारत में चन्दनगौर और अन्य स्थानों पर आने के आसार हैं। हमें उनके लिए कुछ व्यवस्था करनी है, और यह उचित स्थान हो सकता है जहाँ कि उनके लिए व्यवस्था की जा सकती है। यह ठीक ही सुझाया गया है कि यह महसूस किया गया है कि इसे और अच्छी तरह से समाविष्ट किया जा सकता है और इस तरह आगे परिणामस्वरूप, इस प्रश्न पर विचार करने के लिए हमें कुछ समय चाहिए। शायद हम इन अनुच्छेदों को आज ही लेने की स्थिति में हो सकें।
माननीय सभापति : तब हम अनुच्छेद 188 और इससे जुड़े दूसरे आपातकालीन प्रावधानों को ले सकते हैं।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हम अनुच्छेद 275 को भी ले सकते हैं, जो एक आपातकालीन प्रावधान है।
माननीय सभापति : हम अनुच्छेद 275 लें।
श्री नजीरुद्दीन अहमद : महोदय, क्या मैं क्रम की बात पर विरोध कर सकता हूँ? इस प्रक्रिया को समझ पाना कुछ सदस्यों के लिए बहुत ही असुविधाजनक है जो सदन में अपनायी जा रही है। पिछले अवसर पर समझाया गया था कि अनुच्छेद आदेश पत्र में निर्धारित क्रम के अनुसार ही लिए जायेंगे। मैं कोई तकनीकी आपत्ति उठाने की इच्छा नहीं करता हूँ, लेकिन कठिनाई यह है कि सदस्य बहस में बुद्धि मत्ता से हिस्सा लेने के लिए तैयार होकर आये हैं। मध्यावकाश, जो हमने लिया था, के बाद भी एक नियमित प्रक्रिया अपनाने के स्थान पर सदन से एक अनुच्छेद से दूसरे अनुच्छेद पर आगे और पीछे कूदने की आशा की जाती है। मैं मानता हूँ कि यह कुछ मात्रा में असुविधा पैदा कर रहा है और मैं सुझाव देता हूंँ कि सदन से एक नियमित क्रम में कार्यवाही करने के लिए कहा जाना चाहिए। अन्यथा, वहाँ कोई बुद्धिमत्तापूर्ण बहस नहीं होगी।
माननीय सभापति : मैं श्री नजीरुद्दीन अहमद से सहमत होने के लिए प्रवृत्त हूँ कि सदस्यों के लिए अनुच्छेद 211 से 275 पर एकदम से पहुंचना असुविधाजनक है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं अनुच्छेद 212 लेने के लिए तैयार हूँ।