अनुच्छेद 213 अ - Page 52

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सकता हूँ कि जब इस प्रकार के क्षेत्र अस्तित्व में लाये जाते हैं और प्रारूपण समिति उनके प्रतिनिधित्व के संबंध में कुछ प्रावधान बनाने के लिए आमंत्रित की जाती है तब पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा सकती है और एक ताजा अनुच्छेद, कोई अनुच्छेद 67 के बाद, उदाहरणार्थ 67-अ समाविष्ट किया जा सकता है। इसके आगे मैं इस समय कुछ अधिक नहीं कह सकता।

माननीय सभापति : मैं अब संशोधन को मतदान के लिए रखूंगा।

[ अनुच्छेद 213, जैसा कि प्रो. शिब्बनलाल सक्सेना के संशोधन द्वारा संशोधित किया गया, अपना लिया गया तथा संविधान में जोड़ दिया गया। ]

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* माननीय सभापति : तब हम अनुच्छेद 213-अ पर आते हैं।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ : “कि अनुच्छेद

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213 के बाद, अधोलिखित नया अनुच्छेद सन्निविष्ट किया जाय :

213 (1) संसद कानून द्वारा प्रथम अनुसूची के भाग II प्रथम अनुसूची के भाग में उल्लिखित किसी राज्य के लिए तदर्थ रूप से उच्च II में राज्यों के लिए न्यायालय का गठन कर सकती है अथवा संविधान के उद्देश्यों प्रथम अनुसूची के भाग में राज्यों के लिए

उच्च न्यायालय। के लिए इस प्रकार के किसी राज्य में किसी न्यायालय को उच्च न्यायालय।

उच्च न्यायालय घोषित कर सकती है।

(2) इस संविधान के भाग VI के अध्याय VII के प्रावधान इस अनुच्छेद की धारा (1) के संदर्भ में प्रत्येक उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होंगे जैसा कि वे इस संविधान के अनुच्छेद 191 के संदर्भ में किसी उच्च न्यायालय के संबंध में लागू होते हैं और इस प्रकार के संशोधनों या अपवादों, जैसे कि संसद कानून के द्वारा प्रावधान कर सकती है, के अधीन लागू होंगे।

(3) इस संविधान के प्रावधानों के अधीन और उपयुक्त विधानपालिका के किसी कानून के किन्हीं प्रावधानों के अधीन जो इस संविधान द्वारा या इसके अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों के फलस्वरूप बनाये गये हैं, जो किसी राज्य अथवा उसके किसी क्षेत्र के संबंध में तदर्थ रूप से प्रथम अनुसूची के भाग II में विशेष रूप से उल्लिखित

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 2 अगस्त, 1949, पृ. 102