अनुच्छेद 213 अ - Page 53

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस संविधान की शुरूआत के तुरंत पहले न्यायक्षेत्र का उपयोग कर रहा था। ऐसी शुरूआत के बाद किसी राज्य या क्षेत्र के संबंध में ऐसे न्यायक्षेत्र का उपयोग करता रहेगा।

(4) इस अनुच्छेद की कोई बात किसी राज्य, जो तदर्थ रूप में प्रथम अनुसूची के भाग I या भाग III में विशेष रूप से उल्लिखित है, में किसी उच्च न्यायालय के न्यायक्षेत्र को किसी राज्य अथवा उस राज्य के अंदर किसी क्षेत्र जो तदर्थ रूप में उस अनुसूची के भाग II में विशेष रूप से उल्लिखित है तक बढ़ाने के लिए अथवा उससे बाहर निकालने के लिए संसद को अधिकार से अपमानित नहीं करती है।

महोदय, यह याद रखना होगा कि जब सदन ने भाग I में राज्यों के संघटन पर चर्चा की थी, यह तय किया था कि प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय होना चाहिए। भाग II के राज्य भी राज्य है; परिणामतः प्रावधान जो भाग I के राज्यों पर लागू होता है उदाहरणार्थ कि प्रत्येक राज्य का स्वतंत्र उच्च न्यायालय होना चाहिए, वह भाग II के राज्यों पर अवश्य लागू होना चाहिए। दुर्भाग्य से यह प्रावधान प्रारूप में नहीं बनाया गया जैसा कि अब है। परिणामस्वरूप, इस अनुच्छेद 213-अ को सन्निविष्ट कराना आवश्यक हो गया है ताकि यह व्यवस्था की जा सके कि भाग II में सम्मिलित राज्यों में उच्च न्यायालय होगा, या वहाँ कोई उच्च न्यायालय है तो वह उच्च न्यायालय उच्च न्यायालय की तरह माना जाएगा। इस अनुच्छेद की धारा (8) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि वहाँ कोई उच्च न्यायालय नहीं है और यदि भाग II के राज्यों में सम्मिलित किसी विशेष क्षेत्र के लिए किसी उच्च न्यायालय का विशेष रूप से गठन संभव नहीं है तो संसद यह घोषित कर सकती है कि किसी संलग्न क्षेत्र में अन्य निश्चित न्यायालय को उस विशेष क्षेत्र के उद्देश्यों के लिए उच्च न्यायालय ही माना जा सकता है। यह इस अनुच्छेद का उद्देश्य है।

माननीय सभापति : इस अनुच्छेद के लिए कोई संशोधन नहीं है। क्या कोई इस

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पर कुछ कहना चाहता है? तब मैं इसे मतदान के लिए रखूंगा।

प्रश्न हैः

“कि नया अनुच्छेद 213-अ संविधान का भाग बन गया है।“

प्रस्ताव अपना लिया गया।

अनुच्छेद 213अ संविधान में जोड़ दिया गया।

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