34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(2) इस अनुच्छेद की धारा (1) के अंतर्गत जारी की गयी घोषणा (इस संबंध में ’आपातकाल की घोषणा’ कही जाती है) :
(अ) अगली घोषणा किसके द्वारा रद्द की जा सकती है;
(ब) संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जायेगी;
(स) दो महीने की समाप्ति के बाद कार्य करना बंद कर देगी जब तक कि दो
महीने की अवधि की समाप्ति के बाद संसद के दोनों सदनों में प्रस्तावों
द्वारा यह अनुमोदित नहीं कर दी गयी है :
बशर्ते कि यदि इस प्रकार की घोषणा ऐसे समय पर जारी की जाती है जब लोकसभा भंग कर दी गयी है या यदि इस अनुच्छेद के उपखण्ड (स) में बताये गये दो महीने की अवधि के दौरान लोकसभा भंग होती है और वह घोषणा उस अवधि की समाप्ति से पहले लोकसभा द्वारा एक प्रस्ताव के द्वारा अनुमोदित नहीं की गयी है तो वह घोषणा उस तारीख से तीस दिन की समाप्ति पर, जब लोकसभा पुनर्गठन के पश्चात् पहली बार बैठती है, काम करना बंद कर देगी जब तक कि संसद के दोनों सदनों द्वारा उस अवधि की समाप्ति से पहले घोषणा का अनुमोदन करते हुए प्रस्ताव पारित नहीं कर दिये गये हैं।
(3) आपातकाल की घोषणा यह घोषित करते हुए कि भारत की या इसके किसी भाग के किसी क्षेत्र की सुरक्षा को युद्ध, बाहरी आक्रमण या आंतरिक अशांति से खतरा है वास्तविक युद्ध या इस प्रकार के आक्रमण या अशांति के पहले की जा सकती है यदि राष्ट्रपति संतुष्ट है कि इसका सन्निकट खतरा है।“
यह अनुच्छेद वास्तव में पुराना अनुच्छेद 275 है जैसा कि इसका प्रारूप संविधान में है। इस संशोधन द्वारा बहुत कम परिवर्तन किए गए हैं। पहला परिवर्तन जो किया गया है वह धारा (1) में किया गया है। ’युद्ध या देशीय हिंसा’ मूल शब्द थे। वर्तमान धारा जैसी संशोधित की गयी है वह इस प्रकार है “युद्ध या बाहरी आक्रमण, या आंतरिक अशांति।“ यह सोचा गया कि इन शब्दों का उपयोग ’देशीय हिंसा’ शब्दों से ज्यादा अच्छा है क्योंकि यह बाहरी आक्रमण को बाहर रख सकता है जो कि न तो वास्तव में युद्ध है और न युद्ध से कम।
दूसरा परिवर्तन जो सन्निविष्ट किया गया है वह धारा (2) के उपखण्ड (स) में है। मूलतः यह व्यवस्था की गयी थी कि घोषणा छह महीने की समाप्ति पर कार्य करना बंद कर देगी। अब यह प्रस्तावित किया जाता है कि इसे दो महीने की समाप्ति पर कार्य करना बंद कर देना चाहिए। यह महसूस किया गया कि छह महीने का समय बहुत लम्बा समय था।