अनुच्छेद 275 - Page 56

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यह उपबन्ध नया भी है और एक ऐसी स्थिति की व्यवस्था करता है जहाँ घोषणा तब जारी की जाती है जब लोकसभा भंग कर दी गयी है या भंग होने के दौरान जारी की जाती है। नये उपबंध में समाविष्ट प्रावधान है कि यदि घोषणा तब जारी की जाती है जब सदन भंग कर दिया गया है, या पुराने सदन के भंग होने तथा नये सदन के चुनाव के बीच, जारी की जाती है तब नया सदन इसे तीस दिनों के अंदर अनुमोदित कर सकता है।

आखिरी धारा स्वाव्याख्यात्मक है और यह केवल प्रावधान करती है जो मैं सोचता हूँ धारा (1) का इरादा है कि यद्यपि वास्तव में कुछ घटित नहीं होता है, किंतु यदि राष्ट्रपति के विचार में इसका सन्निकट खतरा है तो वह इस अनुच्छेद के प्रावधानों के अंतर्गत काम कर सकता है।

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* श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : ..... इसलिए, मैं कहता हूँ अधिकतर बिन्दु जो इन

प्रावधानों के खिलाफ उठाये गये हैं निरर्थक हैं क्योंकि संसद के अधिकार संरक्षित हैं और जो कुछ मैं बहस में हस्तक्षेप करके कहना चाहता था, वह था कि कोई भी खुश नहीं होगा कि उन्हें इस संविधान में प्रावधान करना पड़ा है, लेकिन ठीक इसी समय हम अपने कर्त्तव्य पालन में असफल हो रहे होंगे यदि हम इन प्रावधानों को संविधान में नहीं रखते जो कि उन लोगों को काबिल बनायेंगे जिनका संविधान की सुरक्षा के लिए भविष्य में देश की मंजिलों पर नियंत्रण होगा, ताकि इस सदन में या और कहीं लोग ये समझेंगे कि इन आपातकालीन प्रावधानों को आवश्यक बुराई के रूप में सहन किया जाना है, और इन प्रावधानों के बिना यह बहुत संभव है कि संविधान को बनाने के सभी प्रयत्न अंततः तहस-नहस हो जायें और संविधान खतरे में पड़ सकता है जब तक कि कार्यपालिका को संविधान की सुरक्षा के लिए पर्याप्त अधिकार नहीं दिये जाते। महोदय, मैं डॉ. अम्बेडकर द्वारा प्रस्तावित संशोधन का समर्थन करता हूँ।

श्री एच. वी. कामथ : क्या मैं अपने माननीय मित्र, श्री टी.टी. कृष्णमाचारी को बता सकता हूँ कि वैमर संविधान के अनुच्छेद 48 के संदर्भ में मैंने जो बात की वह यह है कि हिटलर ने ठीक उन्हीं प्रावधानों का अपनी तानाशाही स्थापित करने के लिए प्रयोग किया था।

माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर बोलना पसन्द करेंगे।

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता; बहुत अधिक देर तक बहस

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हो चुकी है। यदि सदस्यों, जिन्होंने बहस में भाग लिया है, की इच्छा है कि मैं कुछ

* ख्., सीएडी, खण्ड IX, 2 अगस्त, 1949, पृ. 125-126