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माननीय सभापति : संख्या 3006 ठीक तौर पर प्रारूपण प्रकृति का नहीं है। 3006, 3003 का परिणामी है। इसलिए दोनों का प्रस्ताव करना अच्छा होगा।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय, मैं प्रस्ताव करने की प्रार्थना करता हूँः
“कि अनुच्छेद 276 में, ’इस संविधान में समाविष्ट किसी बात का विरोध न करते हुए’ शब्दों को ’तब’ शब्द के बाद मिटा दिया जाय और ’इस संविधान में’ समाविष्ट किसी बात का विरोध न करते हुए’ शब्दों को इसी अनुच्छेद की धारा (अ) के शुरू में सन्निविष्ट किया जाय।“
मैं यह भी प्रस्ताव करता हूँः
“कि अनुच्छेद 276 की धारा (ब) में शब्द ’किसी ऐसी बात का विरोध न करते हुए जो संघीय सूची में नाम लेकर नहीं बतायी गयी है’ अन्त में जोड़ दिये जाएं।“
(पूरक सूची की संशोधन संख्या 119 प्रस्तावित नहीं की गयी।)
माननीय सभापति : दूसरा कोई संशोधन नहीं है।
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यदि मेरे मित्र श्री नजीरुद्दीन अहमद भारत सरकार अधिनियम के अनुच्छेद 126अ को देखेंगे तो वे पायेंगे कि क्यों डॉ. अम्बेडकर का संशोधन आवश्यक है क्योंकि 276(ब) आपातकाल के समय कार्यपालिका का अधिकार संघ को दे देता है जब आपातकाल घोषित कर दिया गया है और ये शब्द अर्थ को पूर्णतया स्पष्ट करने के लिए आवश्यक हैं। भारत सरकार अधिनियम अनुच्छेद 126-अ में प्रयुक्त भाषा के संदर्भ में चीजें स्पष्ट कर दी गयी हैं। यदि वे उस अनुच्छेद को पुनः पढ़ेंगे तो वे पायेंगे कि इस अनुच्छेद में इन शब्दों को सम्मिलित करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
माननीय सभापति : आप कुछ नहीं कहना चाहते। डॉ. अम्बेडकर?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : नहीं, महोदय, मेरे लिए कुछ भी कहना आवश्यक नहीं है।
माननीय सभापति : तब मैं संशोधनों को मतदान के लिए रखूंगा।
[ डॉ. अम्बेडकर का संशोधन अपना लिया गया। अनुच्छेद 276 जैसा संशोधित किया गया संविधान में जोड़ दिया गया। ]
* ख्., सीएडी, खण्ड IX, दिनांक 3 अगस्त, 1949, पृ. 130